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________________ 346 367-416 347 347 348 348 349 350 351 351 352 352 आठों दिशाओं में प्रहरानुसार छींक फल बोधक चक्र चतुर्दश अध्याय उत्पातों के वर्णन की प्रतिज्ञा उत्पात का लक्षण और भेद ऋतुओं के उत्पातों द्वारा फल कथन पशु और पक्षियों के विपरीताचरण का फल विकृत सन्तानोत्पत्ति का फल मद्य, रुधिरादि के बरसने का फल सरीसृप और मेढ़क आदि के बरसने का फल बिना ईंधन के अनि के प्रज्वलित होने का फल वृक्षों से रस चूने का फल वृक्षों के गिरने का फल वृक्षों के स्रवेष्टित होने का फल वृक्षों के रस का फलादेश वृक्षों के आकार-प्रकार द्वारा अनेक प्रकार का फल देवों के हैंसने, रोने, नृत्य करने आदि का फल नदियों के हँसने रोने का फल बिना बजाये बाजा बजने का फल नदियों के जल, उनकी धारा आदि का फल अस्त्र-शस्त्रों के शब्दों का फल बिना बजाये बजने वाले वादित्रों का फल आकाश से अकारण घोर शब्द सुनने का फल भूमि के कंपित तथा वृक्षों के अकारण हरे होने का फल चीटियों के निमित्त द्वारा फल कथन राजा के उपकरणों के भंग होने का फल हाथी, घोड़ा आदि सवारियों के अचानक भंग होने का फल 353 354 355 358 359 359 359 360 361 361 362 362 363 364
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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