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________________ 259 260 261 262 मेघ गर्भो से जलवृष्टि का विचार मैट गौं पर विशेः शिवार मेघ गर्भ के अभाव का फल वराहमिहिर के अनुसार मेघ गर्भ का फल मेघ गर्भ के समय का विशेष विचार चारों दिशाओं में गर्भ धारण का परिज्ञान मेघविजय गणित के अनुसार मेघ गर्भ का विचार तिथि और नक्षत्रों के अनुसार मेघ गर्भ का विचार 263 264 265 265 त्रयोदश अध्याय 269-346 269 269 269 270 270 271 271 271 राजयात्रा के वर्णन की प्रतिज्ञा सफल यात्रिक का लक्षण असफल यात्रिक यात्रा करने की विधि यात्रा में विचारणीय निमित्त यात्रा में निमित्त विचार की आवश्यकता राजा की चतुरग सेना और उसके लिए निमित्त शनिश्चर की यात्रा का फल सेनापति के वधसूचक यात्रा शकुन नैमित्त, राजा, वैद्य और पुरोहितरूप विष्कम्भ नैमित्तिक के लक्षण राजा का लक्षण वैद्य का स्वरूप पुरोहित का लक्षण पुरोहितादि के योग्य होने की बात नैमित्तिक के बिना राजा की दुरावस्था का कथन यात्रा के लिए शुभ योग 273 273 273 274 274 275 275 276 280
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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