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________________ शुभमुहूर्त की यात्रा का फल भूत, भविष्य और वर्तमान का ज्ञान निमित्तों से करना चाहिए निमित्तों की आवश्यकता पर जोर तीन प्रकार भौम, अन्तरिक्ष और दिव्य निमित्तों का कथन गमनकाल के अशुभ निमित्त शुभ निमित्तों का कथन गमन समय में अग्रि का फल गमन समय में हवन का फल धूम युक्त अमि का फल हवन के विशेष रूप के अनुसार फल गमन समय में नेवला, मूषक और शूकर के देखने का फल स्थान विशेष आर हवन में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं के अनुसार हवन का फल सेना के गमन समय में भूकम्प आदि का फल यात्रा के समय के विशेष शकुनों का फल सेना प्रयाण के समय उल्का या उल्कापात का फल जय, पराजय और विजय सूचक यात्रा निमित्त निन्दित यात्रा सूचक निमित्त प्रयाण काल में पीड़ित आदि व्यक्तियों के दर्शन का फल बहिर्भाग की पताका के विकृत होने का फल पशु-पक्षियों के आक्रमण का फल पक्षियों की विकृत आवाज का फल मोटरगाड़ी आदि के टूटने या बिगड़ने का फल प्रयाणकाल की सूर्य किरणों का फल प्रयाण के समय होने वाले शुभाशुभ निमित्त प्रयाण के समय में राजा के विपरीत कार्य करने का फल सूर्य और चन्द्र नक्षत्रों के अनुसार यात्रा का फल यात्रा काल की वायु का विचार 281 282 283 283 284 285 285 285 287 287 289 290 291 291 291 292 294 295 295 295 295 296 296 296 299 299 301
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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