SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 803
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ६२३ द्वाविंशतितमोऽध्यायः (नृपाणां महितश्चापि ) राजाओं का अहित करेगा और भी (स्थावराणां च कीर्त्तितः ) स्थावरों का अहित करता है। भावार्थ — सूर्य उदय होते समय यदि लाल वर्ण का हो, तो शस्त्र प्रकोप होगा, भय उत्पन्न होगा। वस्तुओं के भाव महँगे होंगे, स्थावर देशवासी राजाओं का अहित होगा ॥ ३ ॥ पीतो लोहित रश्मिश्च व्याधि मृत्युकरो रविः । विरश्मिर्धूमकृष्णाभः क्षुधार्त्तसृष्टिरोगदः ॥ ४ ॥ (रवि) सूर्य (रश्मिश्च) की किरणें (पीतो लोहित) लाल, पीली हो तो ( व्याधि मृत्युकरो ) रोग उत्पन्न करेगी व मरण लाएगी (विरश्मेिर्धूमकृष्णाभः ) अगर सूर्योदय की किरणें धूमवर्ण की हो व काली हो तो ( क्षुधार्त्त सृष्टि रोगदः) क्षुधा को बढ़ाएगी, और पृथ्वी रोग से सहित हो जायगी । भावार्थ — यदि सूर्योदय समय उसकी किरणें लाल, पीली हो तो व्याधि उत्पन्न करेगी, मरण करेगी और धूमवर्ण या काली हो तो भुखमरी फैलेगी, वा सृष्टि में रोग फैल जायगा ॥ ४ ॥ नोट —यहाँ जो भी कहा गया है। वह सूर्योदय के समय वाली किरणों को ही लेना है, उसी का शुभाशुभ होता है। कबन्धेनाऽऽवृतः सूर्यो यदि दृश्येत प्राग् दिशि । बङ्गानङ्गान् कलिङ्गांश्च काशी कर्णाट मेखलान् ॥ ५ ॥ मागधान् कटकालांश्च काल वक्रोष्ट्रकर्णिकान् । माहेन्द्रसंवृतोवान्द्रास्तदा हन्याच्च भास्करः ॥ ६॥ यदि (सूर्यो) सूर्य (प्राग् दिशि ) पूर्वदिशा में ( कबन्धेनाssवृतः ) धड़ से ढका हुआ दिखे तो (बाङ्गान् कलित्राश्च) अंग देश, बंग देश, कलिंग देश और (काशी कर्णाट मेखलान्) काशी देश, कर्नाटक देश, मेखला देश (मागधान् ) मगध देश . (कटकालांश्च) कटक ( काल वक्रोष्ट) काल व क्रोष्ट्र देश (कर्णिकान् ) कर्णिका देश (माहेन्द्र संवृतो वान्द्राः ) माहेन्द्र और उड़ देशों का ( तदा) तब वह ( भास्करः ) सूर्य (हन्याच्च) घात करता है।
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy