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________________ S ५७३ विंशतितमोऽध्यायः ( यदा) जब ( उदयास्तमने भूयो ) उदय व अस्त काल में (यश्चोदयो रवौ ) उदय या अस्त काल में पुनः पुनः सूर्य या ( इन्द्रो वा यदि दृश्येत ) चन्द्रमा दिखे तो ( तदा ज्ञेयो ग्रहागमः ) तब ग्रहागमन जानना चाहिये । भावार्थ - जब सूर्य या चन्द्रमा के अस्त या उदय काल में दिखे तो तब ग्रहों का आगमन समझो ॥ १७ ॥ कबन्धा उद्गच्छमाने परिघा - मेघा दृश्यन्ते - धूम - रक्तपट सूर्ये ध्वजाः । राहोस्तदाऽऽगमः ॥ १८ ॥ - ( कबन्धा, परिघा मेघा ) जब मेघ कबन्ध, परिघा (धूम रक्त पट ध्वजा ) धूम, रक्तपट, ध्वजा के ( उद्गच्छमाने दृश्यन्ते) आकार जाते हुऐ दिखे तो समझो ( तदा) तब ( सूर्यैराहोस्तदाऽऽगमः ) राहु का आगमन होने वाला है। भावार्थ — जब मेघ कबन्ध, परिघा के आकार के हो तो और सूर्य धूम के आकार, लाल कपड़े के आकार व ध्वजा के आकार जाते हुए दिखाई पड़े तो समझो राहु का आगमन होनेवाला है ॥ १८ ॥ मार्गवान् महिषाकारः शकटस्थो यदा शशी । उद्गच्छन् दृश्यतेऽष्टम्यां तदा ज्ञेयो ग्रहागमः ॥ १९ ॥ ( यदा) जब (शशी) चन्द्रमा ( मार्गवान् महिषाकार :) मार्गस्थ महिषाकार व ( शकटस्थो) घाड़ी के आकार ( उद्गच्छन दृश्यते) जाता हुआ दिखाई पड़े तो और वो भी (अष्टम्यां ) अष्टमी को तो ( तदा) तब ( ग्रहागमः ज्ञेयो ) ग्रह का आगमन होने वाला है ऐसा समझों । भावार्थ — जब चन्द्रमा मार्ग में गमन करता हुआ महिषाकार व घाड़ी के आकार दिखे और वो भी अष्टमी को तो समझो ग्रह का आगमन होने वाला है ॥ १९ ॥ सिंह मेषो ष्ट्र संकाश: परिवेषो यदा शशी । अष्टम्यां शुक्लपक्षस्य तदा ज्ञेयो ग्रहागमः ॥ २० ॥ ( यदा) जब चन्द्रमा पर ( सिंह मेषोष्ट्रसंकाशः ) सिंह के व मेष के, ऊँट के आकार ( परिवेषो) परिवेष ( शुक्लपक्षस्यअष्टम्यां ) शुक्लपक्ष की अष्टमी को हो तो ( तदा) तब ( ग्रहागमः ज्ञेयो ) ग्रहों का आगमन जानना चाहिये ।
SR No.090074
Book TitleBhadrabahu Sanhita Part 2
Original Sutra AuthorBhadrabahuswami
AuthorKunthusagar Maharaj
PublisherDigambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti
Publication Year
Total Pages1268
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Jyotish
File Size28 MB
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