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________________ ૭૭૮ अनुयोगद्वारसूत्रे ख्येयसूत्रस्य व्याख्याविधिसमीपीकरणं, तस्य तद्विषया वा या निर्युक्तिस्तयास्वद्रूपो वा योऽनुगमः स उपोद्घातनिर्यु क्त्यनुगमः । स चानुपद वक्ष्यमाणाभ्यां द्वाभ्यां मूळगाथाभ्याम् अनुगन्तव्यः = विज्ञेयः । मूलगाथाद्वयमेवाह- 'तंजहा - उद्दे से ' निरुक्ति के अनुसार व्याख्येय सूत्र का व्याख्याविधि के समीप करना, ऐसा है। इस उपोद्घात की जो नियुक्ति है उसका अथवा इस उपोद्घात को करने वाली जो नियुक्ति है, उसका व्याख्यान करना या उस नियुक्तिरूप व्याख्यान करना यह नियुक्ति अनुगम का अर्थ है । इस प्रकार दोनों शब्दों को मिलाकर उपोद्घातनियुक्तिअनुगम का वाच्यार्थ स्पष्ट हो जाता है। इसी विषय को सूत्रकार (हमाहि दोहिं मूलगामहाहि अणुसंत-त ज़हा) इन निम्नलिखित दो गाथाओं द्वारा समझाने के लिये कह रहे हैं-वे गाथाएँ ये हैं- उसे १, निदेले २, निगमे ३, खिसे य ४, काल ५, पुरिसे य ६, कारण ७, पच्चय ८, लक्खण ९, नए १०, समोधारणा ११, णुमए १२, ११ किं. १३ कइविहं १४ कस्स १५ कहिं १६, केसु १७, कहं १८, कैच्चिरं हवइ कालं १९, कइ २०, संनर २१, मविरहियं भवा २३, गरिस २४. फासण २५ निकत्ती २६ ||२|| (सेत उबग्घायनिज्जुत्तिअणुगमे ) यहां 'वक्तव्य' पदका संबन्ध सर्वत्र लगा लेना चाहिये । तथा च उद्देश कहना चाहिये । निर्देश कहना चाहिये । (१) 'उद्देश - सामान्य મુજખ વ્યાખ્યેયસૂત્રની વ્યાખ્યાવિધિ-સમીપ કરવી આવે છે. આ ઉપા. ાતની જે નિયુકિત છે અથવા આ ઉપેદ્યાતને વિષય કરનારી જે નિયુ"કિત છે, તેનુ વ્યાખ્યાન કવું" અથવા નિયુ*કિતરૂપ વ્યાખ્યાત કરવું આ · નિયુકિત અનુગમના અથ છે. આ પ્રમાણે બન્ને શબ્દોને એકત્ર કરીને ઉપે ાત નિયુકિત અનુગમના વાચ્યાય સ્પષ્ટ થઈ જાય છે. એજ વિષયને सूत्रार (इमाहिं दोहि मूळगाहाहिं अणुगंतव्वे - तं जहा) मा निम्न सिमित मे ગાથાઓ વડે સમજાવવા માટે કહી રહ્યા છે. તે ગાથાઓ આ છે. (उसे १, निदेखेअ २, निग्गमे ३, खित्तेय : ४, काल ५, पुरिसेय ६, कारण ७, पच्चय ८, लक्खण ९, नए १०, समोयारणा ११, णुमए १२ ॥१॥ कि १३, कइविह १४, कस्स १५, कहिं १६, केसु १७, कह १८, केंच्चिरं इवइ काल १९, कइ २०, संतर २१, मविरहियं २२, भवा २३, गरिस २४, फावण २५, निरुत्ती २६ ॥ २॥ खे त उबग्घायनिज्जुत्तिअणुग मे ) मही 'वक्तव्य' पड़ना अ'म सर्वत्र गाडी लेह मे तेमन (हेश वाले :.
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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