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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र २३१ औपम्यसंख्यानिरूपणम् - ६२७ वच्छा फलिहभुया दुंदुहित्थणियघोला। सिरिवच्छाकयवच्छा सव्वेऽवि जिणा चउच्चीसं ॥१॥" संतयं असंतएणं उवमिजइ, जहा संताई नेरइयतिरिक्खजोणियमणुस्सदेवाणं आउयाई असंतएहिं पलिओवमसागरोवमेहिं उबमिजंति। असंतयंअसंतएणं उवमिजइ, तं जहा-"परिजूरियपेरंतं, चलंतबिट पडतनिच्छीरं। पत्तंबवलणपत्तं, कालप्पत्तं भणइ गाहं ॥१॥ जह तुब्भे तह अम्हे तुब्भेवि य होहि हा जहा अम्हे । अप्पाहेइ पडतं, पंडुयपत्तं किसलयागं ॥२॥ णवि अस्थि वि य होही, उल्लावो किसयलपंडुपत्ताणं। उवमा खलु एस कया, भवियजण विबोहणटाए ॥३॥” असंतयं असंतएहिं उवमिजइ, जहा :खरविसाणं तहा ससविसाण। से तं ओवम्मसंखा ॥सू०२३१॥ छाया-अथ का सा औपम्यसंख्या ? औपम्यसंख्या-चतुविधा प्राप्ता, तद्यथा-अस्ति सत्कं सत्केन उपमीयते, अस्ति सत्कम् असत्केन उपमीयते, अब.सूत्रकार औपम्पसंख्या का निरूपण करते हैं'से कि त ओवम्मसंखा ? इत्यादि । शब्दार्थ--(से कि तं ओवम्मसंखा ?) हे भवन्त ! औपम्पसंख्या का क्या तात्पर्य है ? उत्तर--(ओवनसंखा चउम्विहा पण्णत्ता) औपम्पसंख्या चार प्रकार की कही गई है । (तं जहा) जैसे-(अस्थि संतयं संतएणं अवमि હવે સૂત્રકાર પમ્ય સંખ્યાનું નિરૂપણ કરે છે. "से कि तं ओषम्मसंखा " इत्यादि Avat:-(से किं तं ओवम्मसंखा ?) BRE! मो५भ्य सध्या તાત્પર્ય શું છે? उत्तर : (ओवम्मसंखा चउन्विहा पण्णत्ता) मो५भ्यः सध्या यार मानी अवाम मावी छे. (तं जहा) रेस (बत्ति संवयं सेवएणं
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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