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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र २२४ आगमप्रमाणनिरूपणम् शाको गणिपिटकः स बोध्यः । स च आचारो यावद् दृष्टिवादो बोध्यः । उत्पन्नज्ञानदर्शनधरादिपदानामा अव भावश्रुतमस्तावेऽभिहितास्तत एव बोध्या। प्रकारान्तरैरागमं निरूपयति-अथवा-आगमस्त्रिविधा प्राप्ता, तद्यथा-सूत्रांगमा सूत्रमेवागमः-सूत्रागमः । अर्थागमः-अर्थ एवागमः-सूत्राभिधेयः अर्थः, स एवागम:-अर्थागमः। सूत्रार्थो भयरूपस्तु आगम उभयागमः। अथवा-अंन्येन प्रकारेणागमत्रिविधो विज्ञेयः। यथा-आत्मागमः, अनन्तरागमः, परम्परागमः । तत्रणाणदंसणधरेहिं तीयपच्चुप्पण्णमणागय जाणएहिं तिलुक्कवहियमहियहएहि सव्वण्णूहिं सव्वदरिसीहिं पणीयं दुवालसंगं गणिपिंडगं) . उत्तर--लोकोत्तरिक आगम का स्वरूप ऐसा है कि-'जो भून वर्त. मान भविष्यत् के ज्ञाता तथा अनंत ज्ञान अनंतदर्शन के धारी सर्वज्ञ अह त भगवंतों द्वारा प्रणीन हुआ है । यह आगम १२ अंगरूप है। इसे गणिपिटक भी कहते हैं । अहंत भगवंत तीनों लोकों में मान्य एवं पूज्य होते हैं । केवलज्ञान केवलदर्शन से ये त्रिलोकवर्ती समस्त पदार्थों के जानने वाले होते हैं। (आयारो जाव दिहिवायो) इस बाद शांगगणिपिटक के नाम आचाराङ्ग यावत् दृष्टिवाद ऐसे हैं। (अहवा आगमे तिविहे पण्णसे तं जहा सुत्तागमे, अस्थागमे, तदुभयागमे) अथवा-इस प्रकार से भी आगम तीन प्रकार का कहा गया हैजैसे सूत्रागम, अर्थागम, तदुभयागम । सूत्ररूप आगम का नाम सूत्रा गम है, अर्थरूपं आगम का नाम-अर्थात् सूत्र द्वारा कहा गया अर्थतेहि भगवंतेहि उत्पण्णणाणदसणधरेहिं तीयपच्चुप्पण्णमणागयजाणएहि तिलुक्क. पहियमहियपूइएहि सवण्णूहि सव्वदरिनीहि पणीयं दुवालसंगं गणिपिडगं)। . 6त्तर-वोत्तर भागभर्नु ११३५ आपुछ १२ भूत, पतमान, . ભવિષ્યના જ્ઞાતા તથા અનંતદર્શનના ધારી સર્વજ્ઞ અહંત ભગવતે વડે પ્રણીત થયેલ છે. આ આગમ ૧૨ અંગ રૂપ છે. આ આગમને ગણિપિટક પણ કહે છે. અહંત ભગવંત ત્રણે લોકોમાં માન્ય અને પૂજ્ય હોય છે. કેવલજ્ઞાન, કેવલદર્શનથી એઓ ત્રિલોકવતી સમસ્ત પદાર્થોના જ્ઞાતા છે. । (आयारो जाव विद्विवायो) in neपिटना नामो माया यावत् टिवा (अहवा आगमे तिविहे पण्णसे- जहा सुत्तागमे, अत्यागमे, 'तदुभयागमे) | मारीत ५] सामना त्रय मारे। . भसूत्रा ' ગમ, અર્થાગમ તદુભયાગમ. સૂત્રરૂપ આગમનું નામ સૂનાગમ છે, અર્થરૂપ આગમનું નામ એટલે કે સૂત્રવડે કહેવાયેલ અર્થરૂપ જે આગમ છે, તેનું
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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