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________________ अनुयोगद्वारसूत्रे वैक्रियशरीरवद् वोध्यानि । प्रकृतमुपसंहरन्नाह - तदेतत्सूक्ष्मं क्षेत्रपल्योपममिति । इत्वं सूक्ष्मव्यवहारो मयविधमपि क्षेत्रपल्योपमं प्ररूपितमिति सूचयितुमाह-देतत् क्षेत्रोपममिति । इत्थं पल्योपमं निरूपितमिति मुचयितुमाह = तदेतत् पल्पोपममिति । तदेव 'समयावळियहुना' इत्यादिगाथा निर्दिष्टास्तदुपलक्षिताश्च सर्वेऽपि का विभाना निरूपिता इति सूचयितुमाह-व देख / इभागनिष्पन्नमिति । इत्थं चसभेदं कालममाणं निरूपितमिति धिमाह-वदेतत् काल माणमति ॥ म्र. २१७॥ ४८० अथ भावममाणं निरूपयति मूलम् - से किं तं भापमाणे ? भावप्यमाणे- तिविहे पण्णत्ते, तं जहा - गुणप्पमाणे नयप्यमाणे संखप्यमाणे ॥सू०२१८॥ जैसा अनंत है । (तेयगकम्यगसरीरा जहा एएलिं चेव वेउनियारीरा तहा माणिकन्या) तैजस और कार्मण शरीर इनके ही वैक्रियशरीरों के जैसा जानना चाहिये । ( से तं सुहुमे खेत्तपलिओवमे-से तं खेत्तपलिओवमे-से तं पलिओ मे से तं विभागनिष्कण्णे-से तं कालप्यमाणे) इस प्रकार यह सूक्ष्म क्षेत्रपल्योपम का स्वरूप है । इसके निरूपित हो हो जाने पर व्यावहारिक और सूक्ष्म के भेद से दो भेदवाले क्षेत्रपत्योपम का स्वरूप पूर्णरूप से निरूपित हो जाता है अतः क्षेत्रपल्योपण का स्वरूप भी निरूपित हो चुका है । 'समयावलियमुहुत्ता' इत्यादि गाथा द्वारा निर्दिष्ट समस्त समयादिरूप काल के विभाग भी निर्दिष्ट हो चुके । इस प्रकार इनके निर्दिष्ट हो जाने पर सभेद काल प्रमाण का कथन समाप्त हो चुका ॥ लू० २१७ ॥ अनंत छे. (वेयगकम्मयसरीरा जहां एएसिं चेव वेउव्वियसरीरा तहा भाणि - . यव्वा) तेस भने धर्म शरीर शेभना वैडिय शरीरानी प्रेम युवां लेणे. (से तं सुडुमे खेत्तपछिओवमे-से तं खेत्तपलिओ मे से तं पलिओनमेसेवं विभागनिष्कण्णे - से तं कालप्यमाणे) या प्रभा सूक्ष्म क्षेत्रपत्येोषमनु સ્વરૂપ છે. આ નિરૂપિત થઇ જવાથી વ્યાવહારિક અને સૂક્ષ્મના ભેદ્રથી એ ભેદવાળા ક્ષેત્રપલ્ચાપમનું સ્વરૂપ પૂર્ણરૂપથી નિરૂપિત થઈ જાય છે, તેથી क्षेत्रपढ्यायमनुः स्व३५ प नि३षित था। जयु हे “समयावलियमुहुत्ता" ઇત્યાદિ ગાથા વડે નિર્દિષ્ટ સમસ્ત સમયાદિ રૂપ કાળના વિભાગ પણ નિર્દિષ્ટ થઈ ચૂકયા છે. આ રીતે એમના નિર્દિષ્ટ થવાથી સભેદ કાળ પ્રમા શુનું કથન સપૂર્ણ થઈ ગયું છે. સૂ૦ ૨૧૭૫
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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