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________________ ४२.. ... ... . .... अनुयोगद्वारसूत्रे एतेषां वैक्रियशरीराणि तथा भणितव्यानि । यथा असुरकुमाराणां तथा याक्त स्वनितकुमाराणां तावद् भणितव्यानि ॥ मू० २१३ ॥ टीका-'नेरइया णं भंते' इत्यादि... नैरपिकाणां भदन्त ! कियन्ति औदारिकशरीराणि प्रज्ञप्तानि ! इति शिष्यप्रश्न उत्तरयति-गौतम ! औदारिकशरीराणि द्विविधानि प्रज्ञप्तानि, तद्यथाबंद्धानि च मुक्तानि च नैरथिकाणां क्रियशरीत्वेन औदारिकबन्धमावादौदारिकशरीराणि न सन्तीत्यतएवोक्तम् तत्र खलु यानि तानि बद्धानि तानि न सन्ति । औदारिक शरीर के जैसा जानना चाहिये । अर्थात् जिस प्रकार बद्ध: औदारिक शरीर असुरकुमारों में नहीं होते हैं, उसी प्रकार बद्ध आहारक शरीर भी अस्तुरकुमारों में नहीं होते हैं। तथा मुक्तऔदारिक जिस प्रकार असुरकुमारों के अनन्त होते हैं, उसी प्रकार से मुक्त आहारक शरीर भी इनके अनन्त होते हैं। (तेयय कम्मथसरीरा जहा एएसिं बेउब्वियसरीरा तहा भाणियव्या) दोनों प्रकार के तैजस शरीर और कार्मण शरीर बद्धमुक्तवैक्रिय शरीर के जैसा असुरकुमारों के जानना चाहिये । (जहा असुरकुमाराणं तहा जाव थणियकुमाराणं ताव माणियव्वं) असुरकुमारों के जैसे ये पांच शरीर कहे गये है, वैसे ही ये पांच शरीर स्तनितकुमारान्त तक के भवनपतियों के भी जानना चाहिये। भावार्थ-इस सूत्रद्वारा सूत्रकार के 'नारकों और भवनपतियों में पांचो शरीरों का कौन २ प्रकार, कितने २ रूप में होता है ? यह सब स्पष्ट એટલે કે જેમ બદ્ધ દારિક શરીરે અસુરકુમારના હોતા નથી, તેમ જ બદ્ધ આહારક શરીર પણ અસુરકુમારમાં હતાં નથી. તથા મુક્ત ઔદારિક જેમ અસુરકુમારોનાં અનંત હોય છે, તેમજ મુક્ત આહારક શરીરે ५५. अनत डाय छे. (तेययकम्मयसरीरा जहा एएसि वेउब्वियसरीरा. सहा भाणियबा) भन्ने तेस शरी२ अने शरीर पर भुत वैठिय शरीरनी म मसुमारानां ५ nyan न . (जहा असुरकुमाराण तहा जाव थणियकुमाराण ताव भाणियव्व) असुरशुभाशन Ami पांय શરી કહેવામાં આવ્યાં છે તેમજ આ પાંચ શરીરે સ્વનિતકુમારાન્ત સુધીના ભવનપતિઓના પણ જાણવા જોઈએ. , ..ભાવાર્થ-આ સૂત્રવડે સૂત્રકારે નારક અને ભવનપતિઓમાં પાંચેપાંચ શરીરના કયા કયા પ્રકારે, કેટલા રૂપમાં હોય છે ? આ બધું સ્પષ્ટ કરવામાં આવ્યું છે. નારક છવામાં ઔદ્યારિકશરીર હેતું નથી કેમકે ત્યાં
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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