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________________ अनुयोगछारसूत्रे वालरगखंडेहि अणाफुण्णा? हंता अस्थि। जहा को दिलुतो? से जहाणामए कोटुए लिया कोहंडाणं भरिए, तत्थ णं माउलिंगा पंक्खित्ता, ते वि माया। तत्थ णं बिल्ला पक्खित्ता तेवि मायां। तत्थ णं आमलगा पक्खित्ता ते वि माया। तत्थ णं बयरा पकिण्वत्ता तेऽवि माया। तस्थ णं चणगा पक्खित्ता तेऽवि माया तत्थ of मुग्गा पक्खिता तेऽवि माया। तत्थ गं सरिसवा पकिसत्ता तेऽवि माया। तत्थ णं गंगावालया पक्खित्ता साकि माया । एवमेव एरणं दिलुननेणं अस्थि र्ण तस्ल पल्लस्स आगाँसपएसा, जे णं तेहिं वालग्गखंडेहि अणापुंण्णा। एएसि पल्लाणं कोडाकोडी भवेज्ज दसगुणिया। तं सुहुमस्त खेत्तसागरोबमसं एगस्ल भवे परिमाणं ॥१॥ एएहिं सुहुमहिं खेत्तसागरोबमोहि किं पओयण ?। एएहिं सुहमपलिओवमसागरोअमेहि दिदिवाए दव्वा मविज्ञति ॥सू० २०८॥ .. छाया-अथ किं तत् क्षेत्रपल्योपमम् ? क्षेत्रपल्योपम-द्विविध प्रक्षतम्, तपामुक्ष्मं च व्यावहारिकं च । तत्र खल यत् सूक्ष्मं तत् स्थाप्यम् । अत्र खलु यत् अब चूत्रकार क्षेत्रपल्यापम का स्वरूप स्पष्ट करते हैं-- - 'से कितं खेतपलिओवमे' इत्यादि । शब्दार्थ-(से कि तं खेतपलिभोवमे ?) हे भदन्त ! क्षेत्रपल्योपम का क्या स्वरूप है ? (खेतपलि ओवमे दुविहे पण्णत्ते) क्षेत्र पल्यापम दो प्रकार का कहा गया है। (तं जहा) वे दो प्रकार ये हैं-(सुद्धमे य वाय હવે સૂત્રકાર ક્ષેત્રપલપમનું સ્વરૂપ સ્પષ્ટ કરે છે– "से कि खेत्तपलि ओवमे"त्याह शहा-(से कि तं खेचपलिओवमे १) 8 मत Iत्र पस्योपमन' ११३५ छ १ (खेचपलिओवमे दुविहे पण्णते १) क्षेत्र यापमान में प्रश छ. (तंजडा) a४ारे। प्रमाणे -(सुहमे य वावहारिए य) १ सक्षम
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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