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________________ ३१८ ___ अनुयोगद्वारसूत्र पञ्चेन्द्रियतिर्यग्योनिकानां पृच्छा, गौतम ! जघन्येन अन्तर्मुहूर्त्तम् , उत्कर्षण त्रिपश्चाशद् वर्ष पहनागि। अपर्याप्त कसंमूछिमोर परिसर्पस्थल वरपञ्चन्द्रियतिर्य योनिकानां पृच्छा, गौतम ! जय येनापि अन्तर्मुहूर्तम् , उत्कर्षेणापि अन्तर्मुहूर्तम् । पर्याप्तकसमूच्छिनोर परिसर्पस्थल वरपञ्चन्द्रियविर्यग्योनिकानां पृच्छा गौतम ! जघन्येन अन्तर्मुहूर्तम् , उत्कर्षेण त्रिपश्चाशद् वर्षशतसहस्त्र णि अन्तर्मुहूत्तौनानि गोयमा ! जहण्गेण अंतोमुहुत उक्कोसेण पुचकोडी) जो थलचर पंचेन्द्रियतिर्यउरपरिसर्प है, उनकी जघन्य स्थिति तो अंगमुहूर्त की है और उत्कृष्ट स्थिति एक करोडपूर्व की है । (समुच्छिमउरखपरिसप्पथलयरपंचिंदियतिरिक्ख जोणियाण पुच्छा-गोयमा ! जहन्नेण वि अंतोमुहुत उक्कोसेग तेवन्नं वाससहस्साई) जो संमूर्छिमजन्मवाले उरा. परिसर्प थलचर पंचेन्द्रियतिर्यश्च जीव है, उनकी जघन्य, से अन्तर्मुहूर्त की स्थिति है और उत्कृष्ट से ५३ हजार वर्ष की है। (अपज्जत्तय संपुच्छिम उरपरिसप्पथल परपंचिंदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा-गोयमा! जहण्णेण अंगोमुहुतं उक्को लेण यि अंहोमुहुस) अपर्याप्तक समूच्छिम जम्नथाले उ परिसर्प थल वर पंचेन्द्रिय तिर्यश्च जीवों की स्थिति जघन्य से भी अन्तर्मुहूर्त की है और उत्कृष्ट से भी अन्तर्मुहूर्त की है। (पज्जसयसमुच्छिमउरपरिसपयलपरपंचिंदियतिरिक्ख. जोणियाणं पुच्छा-गोयमा ! जहण्जेणं अंतोमुहत उक्कोसेण तेवण्ण पुच्छा-गोयमा ! जहन्नेणं अतोमुहुर्स उनकोसेणं पुव्वकोडी) २ सय ५ये. ન્દ્રિય તિર્યંચ ઉરપરિસર્યો છે, તેમની જઘન્ય સ્થિતિ તે અંતર્મુહની છે भने ८ स्थिति से ४२।७ पूर्वनी छ. (समुच्छिमउरपरिसप्पथळयरपंचिंदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा-गोयमा ! जहन्नेण वि अतोमुहुत्तं उकोसेणं तेवन्नं वासनहस्साई) २ स भूमि भार 8२: परिस५ सयर पन्द्रिय તિર્થ ચ છ છે, તેમની જઘન્યથી અન્તર્મુહૂર્તની સ્થિતિ છે અને ઉત્કૃષ્ઠથી ५3 M२ १ रेक्षी छ. (अपज्जत्तयसमुच्छिमउरपरिसप्पथल सरपंचिंदियतिरिक्ख जोणियाण पुच्छा गोयमा । जहण्णेण वि अंतोमुत्तं उक्कोसेण वि अतोमुत्त) अर्यात भूभि सन्माण 8२:५रिस यय२ ५२ન્દ્રિય તિય જીવોની સ્થિતિ જઘન્યથી પણ અન્તર્મુહૂર્તની છે અને ઉત્ક यी ५५ मन्तभुत रेक्षी छ. (पज्जत्तयसंमुच्छिम उरपरिसप्पथल थर. पंचिंदियतिरिक्खजोणियाणं पुच्छा-गोयमा ! जहण्णेणं अतोमुहत्तं उक्कोसेणं
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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