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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र २०७ असुरकुमारादीनामायुः स्थितिनिरूपणम् ३१९ गर्भव्युत्क्रान्तिकोरः परिसर्पस्थलचरपञ्चेन्द्रिय तिर्यग्योनिकानां पृच्छा, गौतम ! जघन्येन अन्तर्मुहूतम् उत्कर्षेण पूर्वकोटिः । अपर्याप्त कगर्भ न्युत्क्रान्तिको रः परिसर्पस्थलचरपञ्चेन्द्रिय तिर्यग्योनिकानां पृच्छा, गौतम ! जघन्येनापि अन्तर्मुहूर्तम्, उत्कर्षेणापि अन्तरर्मुहूर्त्तम् । पर्याप्तगर्भव्युत्क्रान्तिकोरः परिसर्पस्थलचरपञ्चेन्द्रियबाससहरुलाई अंतोमुहुतूणाई ) पर्यातक संमूच्छिमजन्म वाले उरः परिसर्पथलचर पंचेन्द्रिय तिर्यञ्चों की जघन्यस्थिति तो अन्तमुहूर्त की है और उत्कृट स्थिति अन्तर्मुहूर्त कम ५३ हजार वर्ष की है । (गग्भवतिय र परिसमधलयर पंचिदियतिरिक्ख. जोणियाणं पुच्छा-गोपमा ! जहन्नेणं अंतोमुद्दत्तं उकोसेणं पुन्वकोडी) गर्भ जन्मवाले उरः परिसर्प थलचर पंचेन्द्रिय तिर्यञ्चों की स्थिति जघन्य से अंतर्मुहूर्त की है और उत्कृष्ट से एक करोड पूर्व की है। (अपजस गगन्भवक्कंतिय डरपरि सप्पथल पर पंचिदियतिरिक्खजोणिधाणं पुच्छा - गोयमा ! जहण्णेण वि अंतोमुहुस उक्कोसेण वि अंतोमुहुत्त ) अपर्याप्तक गर्भजन्मवाले उरः परिसर्प थलचर पंचेन्द्रिय तिर्यञ्चों का स्थिति जघन्य से भी अंतर्मुहूर्त्त की है और उत्कृष्ट से भी अन्तर्मुहूर्त्त की है । ( अपज्जन्त गगन्भवतिय उरपरिसप्पथलयर पंचिदियतिरिक्ख जोणियाणं - पुच्छा-गोत्रा । जहणेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं अंतोतॄणा पुबकोडी) पर्यातक गर्भज उरः परिसर्प थलचर 9 ठेवण्णं वासहस्वाई अतोमुहुतूणाई) पर्यास संभूभि भन्भवाजा ER: પરિસપ` થલચર પચેન્દ્રિય તિય ચાની જઘન્ય સ્થિતિ તે અન્તમુહૂત્તની के भने उत्कृष्ट स्थिति अन्तर्मुहूर्त न्यून 43 इतर वर्षांनी हे. (गब्भवक्कंतिय उरपरिखप्पथलयरपंचिदियतिरिक्खजोणिया जं पुच्छा - गोयमा ! जहन्नेर्ण अतोमुहुत्तं उक्कोसेण पुव्त्रकोडी) गर्भ नन्भवाजा उ२ः परिसर्प यथेન્દ્રિય તિય ચાની સ્થિતિ જઘન્યથી અન્તર્મુહૂત્તની છે અને ઉત્કૃષ્ટથી એક रोड पूर्वनी छे. ( अपज्जत्तगब्भवक्कंतिय उरपरिवप्पथलयरपंचिदियतिरिक्खजोणियाण' पुच्छा - गोयमा ! जहण्णेण वि तोमुद्दत्तं उक्कोसेण वि अतोमुद्दत्तं) અપર્યામક ગભ જમવાળા ઉર:પરિસપ થલચર પૉંચેન્દ્રિય તિય ચાની સ્થિતિ જઘન્યની અપેક્ષાએ પણ અતર્મુહૂત્તની છે અને ઉત્કૃષ્ટથી પણુ અન્તર્મુહૂત્તની छे. (पज्ज सगगभत्र तिय उरपरिसप्पथलयरपीचद्दियतिरिक्खजोणियाण पुच्छागोयमा ! जण अतोमुहुत्तं उत्कोद्वेणं अतो मुहुत्तूणा पुव्वष्कोडी) पर्यास ગભ જન્મવાળા ઉર: પરિપથલચર પંચેન્દ્રિય તિય ચાની સ્થિતિ જલ,
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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