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________________ अनुयोगन्द्रिका टीका सूत्र २०७ अङ्गुरकुमारादीनामायुःस्थितिनिरूपणम् २९६ अंतोमुहत्तं। बादरपुढवीकाइयाणं पुच्छा, गोयमा! जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं बावीसं वाससहस्साई। अपजत्तगबादरपुढवीकाइयाणं पुच्छा, गोयमा! जहण्णेण वि अंतोमुहुत्तं, उक्को सेण वि अंतोमुहत्तं। पजत्तगबादरपुढवीकाइयाणं - पुच्छा, गोयमा! जहन्नेणं अंतोमुहुरतं, उक्कोसेणं बावीसं वाससहस्साई अंतोमुहुनूणाई। एवं सेसकाइयाणंपि पुच्छावयणं भाणियवं। आउकाइयाणं जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं उक्कोसेणं सत्तवाससहस्ताई। सुहुमआउकाइयाणं ओहियाणं पजत्तगाणं अपजत्तगाणं तिह वि जहण्णेण वि अंतोमुहुतं उक्कोसेणवि अंतोमुहुत्तं । बादर. आउकाइयाणं जहा ओहियाणं। अपजत्तगबादर आउकाइयाणं जहन्नेण वि अंतोमुहुत्तं, उक्कोसेण वि अंतोमुहुत्तं। पजत्तगबादरआउकाइयाणं जहन्नेण अंतोमुहत्तं, उक्कोसेण सत्त वाससहस्साई अंतोमुहुतूणाई। तेउकाइयाणं जहण्णेण अंतोमुहत्तं, उक्कोसेण तिणि राइंदियाई। सुहुमतेउकाइयाणं ओहियाणं अपजत्तगाणं पजत्तगाणं तिण्ह वि जहण्णेण वि अंतोमुहुत्तं उक्कोसेण वि अंतोमुहुत्तं। बादरतेउकाइयाणं जहण्णण अंतोमुहु, उक्कोसेणं तिपिण राइंदियाइं। अपजत्तगबादरतेउकाइयाणे जहण्णेण वि अंतोमुहत्तं, उक्कोलेण वि अंतोमुहुत्तं। पज्जत्तग बादरतेउकाइयाणं जहन्नेण अंतोमुहुत्तं, उक्कोसेण तिणि राइंदियाई अंतोमुहुत्तूणाई। वाउकाइयाणं जहन्नेणं अंतोमुहुत्तं, उक्कोसेण तिणि वाससहस्लाई। सुहुमवाउकाइयाणं ओहि
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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