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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सूत्र १९६ नैरयिकाणां शरीरावगाहनानिरूपणम् ...१६१... है। (तत्थ णं जा उत्तरवे उब्विया सा जहण्णेणं अंगुलस्स मखेज्जहभागं उक्कोसेणं पण्णरसधणू दोन्नि रयणीभो बारस अंगुलाई) तथा जो उत्तर वैक्रियरूप अवगाहना है वह जघन्य की अपेक्षा अंगुल के संख्यातवें भाग प्रमाण है, और उत्कृष्ट की अपेक्षा पन्द्रह धनुष, दो रस्नि, १२ अंगुल प्रमाण है । (सकरप्पहा पुढवीए णेरइयाणं भंते ! के महालिया सरीरोगाहणा पण्णत्ता) हे भदन्त ! शर्करा पृथिवी में नारकों की शरीरावगाहना कितनी होती है ? उत्तर-(गोशमा ! दुविहा पण्णत्ता) हे गौतम ! यह शरीरावगाहनी वहां दो प्रकार की कही गई है (तं जहा) यह इस प्रकार से हैं-(भव. धारणिज्जा य उत्तरवेउब्धिया य) एक भवधारणीय दूसरी उत्तरविक्रिया । (तस्थ णं जा स्सा अवधारणिज्जा, सा जहण्णणं अंगुलस्स असंखेजहभागं, उकोसेणं पण्णरसधणूई दुण्णि रयणीओ, बारसँ अंगुलाई ) इनमें जो भवधारणीय अवगाहना है वह जघन्य से अंगुल के असंख्यातवें आग प्रमाण है और उत्कृष्ट से १५ धनुष दो रत्नि एवं १२ अंगुल प्रमाण है । (तत्थ णं जा सा उत्तरवेउव्विया सा जहण्णणं अंगुलस्त संखेज्जहभागं उक्कोसेणं एकतीसं धणूइं एकरयणीय) उत्तर अशुख प्राय छे. (तत्थ णं जा उत्तरवेउब्धिया सा जहण्णेणं अंगुलस्स संखेज्जई. भागं उक्कोसेणं पण्णरसधणू दोणि रयणीओ बारस अंगुलाई) तेभ रे त्तरઐક્રિય રૂપ અવગાહના છે તે જઘન્યની અપેક્ષા અંગુલના સંખ્યામાં ભાગ પ્રમાણે છે અને ઉત્કૃષ્ટની અપેક્ષા પંદર ધનુષ, બે પત્નિ, ૧૨ અંગુલ પ્રમાણ छ. (सक्करप्पहा पुढवीए णेरड्याणं भंते ! के महालिया सरीरोगहणा पण्णत्ता) હે ભદંત! શર્કરા પૃથિવીમાં નારકોની શરીરવગાહના કેટલી છે? - उत्तर-(गोयमा! दुविहा पण्णत्ता) 8 गीतम! शरीरावगाना त्या से प्रारन वाम मावी छे. (तंजहा) मा प्रभाव छ. (भवधारणिज्जा ये उत्तरवेउब्विया य) मे अवधारणीय भने भी उत्तरवलय (तत्थ णं जा सा.. भवधारणिज्जा, सा जहण्णेणं अंगुलस्स असंखेज्जइभाग, उक्कोसेणं पण्णरसघणूई. दुण्णि रयणीओ, बारस अंगुलाई) मामा २ qधारय माना छे, . જઘન્યથી અંગુલના અસંખ્યાતમા ભાગ પ્રમાણ છે અને ઉત્કૃષ્ટથી, ૧૫. धनुष मे २लि अन १२ Y प्रमाण छ. (तत्थ गं जा सा उत्तरवेविया सा जहण्णेणं अंगुलस्स संखेज्जहभागं उक्कोसेण एकतीसं धणूई एक्करयणी य) अ० २१
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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