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________________ अनुयोगचन्द्रिका टीका सुत्र १४१ सामाचार्यानुपूर्वी निरूपणम् निमन्त्रणा, उपसंपन् । सैपा पूर्वानुपूर्वी । अथ का सा पश्चानुपूर्वी, पश्चानुपूर्वीउपसंपद यादिच्छाकारः । सैपा पूर्वानुपूर्वी । अथ का सा अनानुपूर्ती ? अनानु पूर्वी-एतस्यामेव एकादिकायामे कोतरिकायां दशगच्छगतायां श्रेण्यामन्योन्याभ्यासो द्विरूपोनः । सैपा अनानुपूर्वी । सैषा सामाचार्यानुपूर्वी ॥० १४१॥ टीका-' से किं तं' इत्यादि अथ का सा सामाचार्यानुपूर्वी ? इति शिष्यप्रश्नः। सामाचार्यानुपूर्वीसमाचरणं समाचारः शिष्टजनाचरितः क्रियाकलापः, स एव सामाचारी, स्वार्थेप्यञ् , पित्वान्डीप् , तद्रूपा आनुपूर्वी सामाचार्यानुपूर्वी । सा हि पूर्वानुपूर्व्यादि अब मूत्रकार मामाचारी आनुपूर्षी का कथन करते हैं -- “से कि तं मामायारी आणुपुब्बी" इत्यादि ।। शब्दार्थ--से किं तं सामायारी आणुपुव्वी) हे भदन्त ! पूर्वप्रकान्त सामा वारी आनुपूर्वी का क्या स्वरूप है ? उत्तर-(सामायारी आणुपुयी तिविहा पण्णत्ता) सामाचारी आनुपूर्वी का तात्पर्य है शिष्यजनों द्वारा आचरित क्रियाकलाप रूप समाचार । यह समाचार ही स्वार्थ में व्यञ् प्रत्यय और डीप होने से सामाचारी ऐसा बन जाता है। इस सामाचारी रूप जो आनुपूर्वी है। वह सामाचारी आनुपूर्वी कही जाती है। यह आनुपूर्वी तीन प्रकार की कही गई है । (तं जहा) जैसे (पुन्धाणुपुबी,पच्छाणुपुग्धी, अणाणुपुब्धी)पूर्वानुपूर्वी पश्चानुपूर्वी और अनानुपूर्वी। (से किं तं पुव्वाणुपुव्वी) हे भदन्त! पूर्वापूर्वी सामाचारी क्या है? હવે સૂત્રકાર સામાચારી આનુપૂર્વીનું નિરૂપણ કરે છે" से किं तं सामायारी आणुपुवी " त्याह शा-(से किं तं सामायारी आणुपुव्वी) भगवन् ! पूर्वहित સામાચારી આનુપૂર્વીનું સ્વરૂપ કેવું છે? 6त्तर-(सामायारी आणुपुब्बी तिविहा पण्णत्ता, तंजहा) शिष्य द्वारा આચરિત ક્રિયાકલાપ રૂપ સમાચારને સામાચારી આનુપૂર્વી કહે છે. તે સમા ચાર જ સામાચારી રૂપ હોવાથી તેનું નામ સામાચારી પડયું છે. આ સામાચારી રૂપ જે આનુપૂર્વી છે તેને સામાચારી આનુપૂવ કહે છે. તેના नाये प्रमाणे त्रय २ ४ा छ-(पुवाणुपुत्री पच्छाणुपुब्बी, अणाणुपुव्वी) (१) पूर्वानुषी', (२) ५श्वानुषी अने (3) अनानुपूवी. प्रश्न-(से किं तं पुवाणुपुत्री') 3 मान्! पूर्वानुन साभायारीनु સ્વરૂપ કેવું છે ?
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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