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________________ ५१२ मनुयोगवार पुब्बी य अणाणुपुव्वी य, एवं जहा दवाणुपुवीए संगहस्स तहा खेत्ताणुपुवीए वि भाणियव्वं जाव से तं संगहस्स भंगोवदंसणया। से किं तं समोयारे ? समोयारे-संगहस्स आणु. पुचीदव्वाइं कहिं समोयरंति ? किं आणुपुवीदव्वेहि समोय. रांति? अणाणुपुवीदवेहिं ? अवत्तबगदहिं ? तिण्णिवि सटाणे समोयरंति। से तं रूमोयारे। से किं तं अणुगमे ? अणुगमे अट्ठव्हेि पण्णते, तं जह!-संतपयपरूवणया जाव अप्पाबहुं नस्थि । संगास्स आणुपुटीदवाई किं अत्थि पत्थि ? णियमा अस्थि । एवं तिषिण वि। सेसगदाराई जहा दव्वाणुपुबीए संगहस्त तहा खेत्ताणुपुबीए वि भाणियबाइं जाव से तं अणुगमे । से तं संगहस्त अगोवणिहिया खेत्ताणुपुवी। से तं अणोवणिहिया खेत्ताणुपुवी ॥सू०११९॥ छापा--अथ झा वा संत्रस्य अनिधिकी क्षेत्रानुनी ? संग्रहस्य भनौषनिधिको क्षेत्रानुपूर्वी पञ्चविधा प्रज्ञप्ता, तद्यथा-अर्थ पदप्ररूपणता १, भंगसमुत्कीर्त इस प्रकार नैगमव्यवहारनयसंमत अनौपनिधिकी क्षेत्रानुपूर्वी का कथन करके भय सूत्रकार संग्रहनयमान्य अनौपनिधिकी क्षेत्रानुपूर्वी का कथन करते है-से कि तं इत्यादि शब्दार्थ- ( से किं तं संगहस्स अणोवणिहिया खेसाणुपुव्वी ?) प्रश्न-हे भदन्त ! पूर्वरक्रान्त पहिले प्रारंभ की हुई उस संग्रहनय मान्य अनोपनिधिकी क्षेत्रानुपूर्वी का क्या स्वरूप है ? આ પ્રકારે નિગમવ્યવહાર નયસંમત અનૌપનિધિ કી ક્ષેત્રાનુપૂર્વીનું નિરૂપણ કરીને હવે સૂત્રકાર સંગ્રહનયસંમત અનોપનિધિકી ક્ષેત્રાનુપૂર્વીનું नि३५५ रे छ-" से किं तं" त्याह शा-(से किं तं संगहस्स अणोवणिहिया खेत्ताणुपुव्वी) मापन। પૂર્વ પ્રકાન્ત-પહેલાં જેને પ્રારંભ થઈ ચુકી છે એવી–સંગ્રહનયસંમત અનપનિશ્ચિકી લેત્રાનું વનું સ્વરૂપ કેવું છે !
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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