SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 390
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ अनुजेगवन्द्रिका टोका सूत्र ८८ भागद्वारनिरूपणम् कि संख्येयतमभागे भवन्ति ? असंख्येयतमभागे भवन्ति ? संख्येयेषु भागेषु भवः न्ति ? असंख्येयेषु भागेषु भवन्ति ? नो संख्येयतमभागे भवन्ति, नो असंख्येयतममागे भवन्ति, नो संख्येयेषु भागेषु भान्ति, नियमात् असंख्येयेषु भागेषु भवन्ति । नैगमव्यवहारयोरनानुपूर्वी द्रव्याणि शेषद्रव्याणां कियद्भागे भवन्ति ? किं संख्येयतमभागे भवन्ति ? असंख्येयतमभागे भवन्ति ? संख्येयेषु भागेषु पूर्वी द्रव्य ( सेसदवाणं )शेष द्रव्यों में ( कहभागे) कितने भाग में (होज्जा) है । (किं) क्या (संखेज्जइ भागे होज्जा) संख्यातवें भोग में हैं? (खेज्जेप्लु भागेषु होज्जा) अथवा संख्यात भागो में हैं ? अथवा (असंग्विजह भागे होजा) या असंख्यातवें भाग में है. ( असंखेज्जेसु भागेषु होज्जा ) या संख्यात भागो में हैं? (बो संखिज्जइभागे होज्जा नो असखिज्जाभागे होज्जा) न संख्यातवें भाग में हैं न असंख्यातवें भाग में हैं (नो संखेज्जेसु भागेसोज्जा ) और न संख्यात भागों में हैं, किन्तु (नियमा) नियम से वे (असंखेज्जेतु भागेसु होज्जा) असंख्यात भागों में हैं। (णेगमवषः हाराणं अणाणुपुल्बी दवाई) नैगम व्यवहारनय संमत समस्त अनान पूर्वी द्रव्य (सेसवाणं कहभागे होज्जा ) शेष द्रव्यों की कितने भाग में हैं? किं) क्या (संखिज्जइ भागे होज्जा) संख्यातवें भाग में हैं? मानुषी' द्र०य (सेसव्व ण) sीना न्याना (कइभागे होज्जा ?) 8281 भागमा छ १ (किं संखेजइभागे होज्जा ?) शु स"यातमा समi ? (असंखेज्जइ भागे होना) मध्यातमा लामा छ? (संखेज्जेसु भागेस होजा)सप्यात सागमा छ ? (असंखेन्जेसु भागेसु होज्जा )असण्यात भागमा १ उत्त२-( नो संखिज्जइभागे होज्जा, नो असंखिज्जइमागे होज्जा, नो संखेज्जेसु भागेसु होजा) समस्त मानुपूरी द्रव्य माना योना सन्याતમાં ભાગમાં પણ હેતું નથી, અસંખ્યાતમાં ભાગમાં પણ હેતું નથી, यात मागीमा ५५ हातु नथी, ५२न्तु (नियमा असंखेज्जेसु मागेसु होज्जा) નિયમથી જ તે સમસ્ત આનુપૂર્વી દ્રવ્ય બાકીનાના અસંખ્યાત ભાગમાં હોય છે. (णेगमववहाराणं अणाणुपुव्वी दवाई ) म भने ०५१६॥२ नयभत समस्त मनानु द्र०य (सेसव्वाण कहभागे होज्जा ?) मानना योना arwi नागनु राय ? (किं संखिज्जाभागे हान्या) सभ्यातमा लामा हाय छे' (असंखिज्जइमागे होज्जा) अपातमा
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy