________________ सुमित्र चरि // 49 // | अर्थ-त्यांथी अहीं आबीने महोत्सव पुरःसर मातापिताए आपेली एवी मने रुपवती सतीने ते परण्यो. // 37 // विवाहानंतरं भर्चा | सहाहमचलं सुखं // इतोऽखंडप्रयाणैश्चा-गच्छं श्वशुरमंदिरं // 38 // __ अर्थ-विवाह थया पछी हु भरिनी साथे सुखपूर्वक शंखपुर जवा चाली अने अखंड प्रयाण करतां अंमे श्वसुरमंदिरे पहोंच्या. बहुकालं सुखं भुक्तं / मया भर्तुः प्रसादतः // क्रमेणाजनि पुत्राणां / त्रयं मत्कुक्षिसंभवं // 39 // अर्थ-में भरिनी दयाथी बहु काळ सुधी सुख भोगव्यु. अनुक्रमे मारी कुतिथी त्रण पुत्रो थया. // 39 // दिवं गतः श्रुतस्तातो / बांधवे कनकध्वजे // राज्यप्राप्तिः प्रिया तस्य / श्रुता कनकमंजरी // 4 // ___अर्थ-एवामां में सांभळ्यु के-'मारा पिता स्वर्ग गया छे अने मारा बंधु कनकध्वजने राज्यमाप्ति थइ छे. तेनी राणी कनकगंजरी नामें छे. // 40 // प्रियंगुमंजरी नाम / मभ्रातुः पुत्रिका मया // श्रुता सर्वगुणोपेता। रुपेण रतिसन्निभा // 41 // ___ अर्थ-अने तेने प्रियंगुमंजरी नामे पुत्री थइ छे के जे सर्वगुणसंपन्न छे तेमज रुपवडे रति जेबी छः // 41 // मद्भात्रा प्रेषितं स्नेहा-द्वस्त्राभरणखादिमं // लेभेऽहं बहुशो वारान् / यतः स्त्रीसुखदं हि तत् // 42 // अर्थ-मारा भाइए स्नेहवडे मोकलेल वस्त्राभरणादि घणा वखत सुधी मने मळ्या कयु. स्त्री जातिने ए हकीकत सुख आपनारी छे. // 42 // DOOOOOOOOOOO HD HOTE * // 40 // | // 49 // Jun Gun Aaradhak Trust PP.AC.Gunratnasuri M.S.