SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 30
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ 22 स्त्रीचरित्र-पुत्र उत्पन्न होगा, सो वोभी आज्ञानी नहीं होगा मैं उसको ज्ञान उपदेश कर दूंगी, सो जब पुत्र उत्पन्न हुये उनको पालनेमें झुलाते समय, जो ज्ञानोपदेश मदालसाने किया वह यह है। / शुद्धोसी बुद्धोसी निरंजनोसि संसार मायापरी वर्जितोसि // संसार स्वप्नं त्यजमोह निद्रां मदालसा वाक्यमुवाच पुत्रम् // 41 // अर्थ-हे पुत्र! तू शुद्ध है, और ज्ञानी है, और संसाकी मायासे रहित है, यह संसार स्वम है, इसमें मोहरूपी निद्रा है, इसका परित्याग करो, // 41 // यहां एक दृष्टान्त है,। दृष्टान्त. एक दरिद्री मनुष्य लकडियोंका बोझा लेकर चला. और बोझेसे थककर प्यासा हुवा और वहीं वनमें कुवाँ _ ढूढने लगा, जब एक वृक्षके नीचे कुवेंको पाया तब P.P. .GunrathasuriN hak
SR No.036493
Book TitleStree Charitra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1904
Total Pages236
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size175 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy