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________________ भाषाटीकासहित... 19 . अर्थ-जैसे जैसे इसके कुच उठते जाते हैं, तैसे तैसे . कामीजन कटाक्ष चलाते हैं. अहो! असाधुजन पराया उदय नहीं सह सकते. क्योंकि असाधुजन स्वभावसेही मलिन अन्तःकरणवाले होते हैं // 14 // - बहुतेरे असाधु जन स्वभावसेही दुष्ट होते हैं. के किसी भांति सुधारे नहीं सुधर सकते. दो०-कोइलाहोय न ऊजरो, सौ मन साबुन लाय // मरखको समझाइये, ज्ञानगाँठको जाय // 15 // बिनाकुचनकी कामिनी, बिनमूछनको ज्वान // ये तीनो फीके लगें, बिना सुपारी पान॥१६॥त्रियाचरितमें जो फंसत,सो खोवत निजमान॥ जगमें निन्दा करत सब, लगत कलेजे बान // 17 // सोमानरहै तौ प्रान, भानहीन जीवन वृथा राखौ दृढकरिमान, जोजीवन च हौसुखद॥ 18 // दोहा-बडे बडे पंडितगुणी,नारीके वश होय॥ P.P. Ac. Gunratnasuri M's Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036492
Book TitleStree Charitra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1920
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size158 MB
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