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________________ . भाषाटीकासहित. 143 - हे मित्र ! पंडितजनोंको स्त्रीके फंदमें फंसना नहीं. चाहिये. यदि तुम्हारा चित्त ऐसाही है तो शीघ्र तुह्मारा विवाह इससे भी अच्छी सुन्दरीके साथ करादेंगे. - यह सुनतेही मदनमोहनने उत्तर दिया. दो-मनमें हमरे बतगई, सुनो हमारे यार। बिन देखे उसके मुझे, आवै नहीं करार ॥४२॥चात्रक प्यासो मरत है, रहै नदीके पास // उस जलको पावै नहीं, करें स्वातिकी आस॥४३॥ इश्करंग हमने रँगा, अब चाहै सो होय॥ प्यारीके दीदार बिन, केहि विधि जीतब होय // 44 // नाहक तुम मूरख बने, होके चतुरसुजान॥ सोच समझ घ. रको चलौ, तजौ इश्ककीवान ॥४९॥इश्क कन्दमचित्तको, मती फँसावौ यार कहा हमारामानलो,क्यों होते हो ख्वार // 46 // मिलना उसका कठिन है, सुनलो सारा हा P.P. Ac. Gunratnasari.M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036492
Book TitleStree Charitra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1920
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size158 MB
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