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________________ श्रीपाल प्रस्ताव तीसरा. चरित्र. 32 // RERASARAGARMER अब धवल सेठने राजाको बहुतसा भेटना किया और उनकी आज्ञा लेकर नानाविध वार्जित्रोंके | बजाते हुवे जहाजोंमें सवार हुवा, बीचमें अनेक याचकोंको योग्य दान दिया-सेठने तमाम यात्रियोंको यथोचित सूचना कर नाविक लोंगोंको हुकम दिया कि अहो पोतसंचालकों! अपने पोत समुदायको रत्नछीपके प्रति चलाओ! आज्ञा पातेहि निर्यामक लोग लंगर खींच कर चलाने लगे किन्तु जहाजें न चल सकी, तब धवल सेठ चिन्तातुर होकर नीचे उतरा और शहरमें जाकर सिकोत्तरी मातासे पूछा हे मात! मेरी जहांजे क्यों अटक गई हैं ? जबाब मिला कि हे वत्स! क्षुद्र देवताओने उन्हें 5 स्थगित कर दी हैं अतः यदि तूं को बत्तीस लक्षण वाले पुरुषका बलिदान दे तो वे अभी चल 5 सकती हैं, यह सुनकर सेठ पुनः भेटना लेकर नृपतिके पास गया और मुक्ताफलादि (मोति | वगेरा ) भेट कर अपना दुःख जाहिर किया और उसकी शान्तिके लिये बत्तीस लक्षणी पुरुषकी 6 याचना की, सुनकर राजा बोले-तुम नगरमें शोधकर ऐसे पुरुषका खुशीसे बलिदान देदो, म. | गर यह खयाल रखना कि वह पुरुष विदेशका हो-इस नगरका नही-इस आज्ञाको पाकर से // 3 Ac.GunratnasuriM.S. Jun Gun Aaradha
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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