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________________ SS है शीघही दर्शन देना, यह पुनः 2 प्रार्थना है. अब श्रीपाल कुमार अत्यन्त हर्षित होकर खग हा॥ थमें धारण कर एक दम तैयार हो गये, मातेश्वरी को सादर वंदन कर मदनसुन्दरीसे मिले | और मङ्गल तिलक कराकर शुभ मुहूर्तमें एकाकी विदेशके लिये प्रस्थान किया. जटिकाध्य और स्वर्णखण्डकी प्राप्ति. AAAYS श्रीपालकुमार ग्राम-नगर-पट्टानादिमें कौतुक देखते हुवा सिंहकी तरह निर्भय चित्त एक गिरिवरपर पहुंचे, वहांपर नन्दन वन सदृश वनमें हंस-सारसकुंजित रम्य सरोवर पर अखण्ड | वनखण्डमें चंपक नामका एक सुन्दर तरुवर है, उसके नीचे एक मन्त्रधारी विद्याधरको उदा. | सीन भावमें देखा तब कुमार उसके प्रति बोले-महानुभाव! उदास क्यों बेठे हो? उत्तर मिला GolLAC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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