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________________ %AAAAAAESEASON | आग्रहपूर्वक कहा-ज्योतिषीजी! जैसा हो वैसा ही मगर लग्न तुरन्त नक्की करो; शिवभूतिने ला. चार होकर अनबनता मुहूर्त बनाकर अमुक दिन निश्चय किया. इधर राजाने अपने सुबुद्धि मन्त्रीको हुकम किया कि अपनी बड़ी कन्याके विवाह निमित्त 8 महा विभूतिके साथ सामग्री तैयार कराओ-मन्त्रीश्वरने स्थान 2 पर महोत्सव आरंभकरवाये; तोरण, ध्वजा, पताकादि सारे शहरमें बंधवाई-गीत, गान, नृत्यादिका आनन्द उछलने लगा, ताल, कंसाल, ढोल, नकारा, भेरी, झबरी वगेरा वाजिन्त्र बजने लगे-गणिकाएं नाच करने 81 लगी-भट्ट लोग विरुदावली बोलने लगे-चारण लोग जय 2 शब्दोंकी घोषणा करने लगे-सधवा || स्त्रियें धवल मगल गाने लगी-सर्व ज्ञातीय, गौत्रीय और अनेक राजा वगेरा लोग एकत्रित हुवे; अब आज खास लमका दिवस आन पहुँचा है. ... * मात्र गाने बजानेका धंधा करने वालीको ‘गणिका' कहते हैं. R A C.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradell
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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