________________ पुण्यादय चरित्रं 48i . सान्वय भाषान्तर // 48 // अन्वय:-नूनं गजा ज्ञानी, अनेन राज्यं वर्धिष्णु वीक्ष्यते, इति मंत्रिणाः अस्य विचित्रं प्रवेशोत्सवं व्यधुः // 11 // , अर्थ:--खरेखर (आ) हाथी ज्ञानी छे, अने ते आ पुरुषवडे राज्यनी वृद्धि जोइ रहेलो छे, एम विचारी मंत्रिओए तेनो आश्चर्यकारक प्रवेशमहोत्सव को. // 116 // अज्ञातकुलशीलस्याप्युन्मीलद्भाग्यशालिनः / राज्याभिषेकमडल्यं तेनिरेऽस्य नरोत्तमाः॥ 117 // - अन्वयः-अज्ञातकुलशीलस्य अपि उन्मीलद्भाग्यशालिनः अस्य नरोत्तमाः राज्याभिषेकमंगल्यं तेनिरे. // 117 // अर्थ:-अजाण्या कुल शीलवाळो छतां पण उदय पामता भाग्योथी मनोहर थयेला एवा ते पुरुषनो ते उत्तम पुरुषोए मंगलकारी राज्याभिषेक कर्यो.।। 117 // . राज्यप्रधानबर्गस्तं ननाम च नाम च / पुण्यर्द्धिभावतस्तस्मिन्पुण्याढ्य इति निर्ममे // 118 // अन्वयः-च सज्यप्रधानपुंवर्गः तं नानाम, च पुण्यऋद्धिभावतः तस्मिन् “पुण्यात्यः" इति नाम निर्ममे.॥ 118 // filiastriM.S.