________________ सान्वय भाषान्तर 1185 09999999999999999999 पुण्याढ्य पुरः सुरससौ कंचिच्चञ्चदर्चिषमैक्षत / न यक्षं न च यक्षौको न च यक्षार्चकान्वने // 449 // ... चरित्रं "अन्वयः-असौ पुरः चंचन आषि कंचित् सुरं ऐक्षत, च धने न यक्षं च न यक्षओका, यक्षअचुकान्. // 449 // 11851 अर्थ:-(बळी तेणे (पोतानी आगळ चळकता तेजवाळा कोइक देवने दीठो, परंतु वना न यक्षने, के न यक्षना मंदिरने, के यक्षना पूजारी एवा ते यात्रालुओने पण न जोया. // 449 // स्मिांशुकुसुमश्रेणिशृङ्गारसुरभीकृतम् / मुखश्रीलक्षितप्रीतिरित्यादत्त वचः स च // 450 // अन्वयः च मुख श्री लक्षित भीतिः सः स्मित अंशु कुसुम श्रेणि श्रृंगार सुरभीकत इति वचः आदत्त, // 450 // अर्थः-वळी मुखनी शोभाथी देखाडेली छे प्रीति जेणे एवो ते देव हास्यना किरणोरूपी पुष्पोनी माळाथी अलंकृत तथा मुगंधि थयेलु वचन बोल्यो के, // 450 // एकः पुण्यवतां रत्नं निःसपत्नगुणो भवान् / भवादृशां प्रसूत्यैव रत्नगर्भा बभूव भूः // 451 // . PAC Gupratnasuri MS Jun Gun Aaradhak Trust