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________________ peec000000MTIODICTION सान्धय पुण्याढय चरित्रं भाषान्तर 1156 अर्थः (ते व्यापारमा ) केटाव थवाना रसना स्वादनी युक्तिओवडे तैऔ बन्ने एटला तो मशगुल थया, के जेथी ते कार्य करतोज तेओनी आखो दिवस व्यतीत थयो. // 380 // ती धाम यामिनीयामसमये समुपागतो। अभुक्त्वैवापतुः स्वापं तदभिग्रहसाग्रही // 381 // अन्वयः-यामिनी याम समये घाम समुपागतौ तदभिग्रह साग्रही तो अभुक्त्वा एव स्वापं आपतुः // 38 // अर्थ:-रात्रिने पहले पहोरे घेर आन्याबाद पोताना नियममा निश्चल एवा तेओ बन्ने भोजन कर्या विनाज उघी गया. // 38 // इति व्यवहति पित्रा कार्यमाणो रसैन तौ / अजातभोजनावेव प्रसुती पश्च शर्वरीः // 382 // अन्वयः-इति पित्रा व्यवहति कार्यमाणौ तौ रसैन अजातभोजनौ एवं पंच शरी: प्रसुप्तौ. // 342 // अर्थः-एवी रीते पिताए व्यापारमा जीडेंला एका तेओं बने (तेना) रसथी भोजन कर्याविनाज पांच रात्रिसुधी सुइ रहा. षष्ठऽहनि निशारम्भे सभेजतुस्मिी गृहम् / आचष्ट च वचः श्लक्ष्णं विनयेन यशोधनः // 383 // 00000000000000000000 PRASWERS HD SERIES CERA CAMERA MAIRMANANTRA ...... . KantieRNIMAR
SR No.036475
Book TitlePunyadhya Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1928
Total Pages229
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size64 MB
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