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________________ पुण्याढय चरित्र सान्त्रय भाषान्तर प्रपंचजाळ रचवानुं जे चितवन, तेने चीजें (मृषानुबंधी) रौद्रध्यान जाणवू. // 265 // . तृतीयं त्वतिदुष्टस्य भूरिलोभक्रुधाहृदः। भूतघातपरद्रव्यापहारप्रणिधामयम् // 266 // (अन्वयः-अतिदुष्टस्य भूरिलोभधाहदः भूतघात परद्रव्य अपहार प्रणिधामयं तु तृतीयं. // 266 // . अर्थ:--अत्यंत क्रूर तथा अति लोभ अने क्रोधयुक्त मनवाला मनुष्यनुं जीवहिंसा करीने पण परधनने हरवाना विचारवाळू जेल चितवन तेने त्रीजु (चौरानुबंधि) रौद्रध्यान जाणवू. // 329 // . शब्दादिविषयापूर्तिहेतुषु द्रविणेषु यत् / लब्धिसंग्रहसंरक्षाप्रणिधा तत्तुरीयकम् // 267 // .. अन्वयः-शब्द आदि विषय आपूर्ति हेतुषु द्रविणेषु यत् लब्धि संग्रह संरक्षा प्रणिधा तत् तुरीयकं // 267 // अर्थ:-शब्दादिक इन्द्रियोना विषयोने पूरा पाडवाना कारणरुप एवा धनना संबधमां, तेने मेळववा माटे, तेनो संग्रह करवा माटे, तथा तेना रक्षण माटे जे चितव, तेने चो) (परिग्रह रक्षणानुबंधी रौद्रध्यान जाणवू. // 37 // Gun Aaradhak Trust
SR No.036475
Book TitlePunyadhya Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1928
Total Pages229
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size64 MB
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