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________________ 146 णायकुमारचरिउ [9. २.७सम्मत्तहो सुधम्मणिवित्ति व दाणेसहो घरि ठिय रिसिपंति व / सरसहो सुललियकव्वपउत्ति व भमरहो णवसररुहरसभुत्ति व / वइयायरणहो कयपयवित्ति व देसहोणरवइणायपवित्ति व। कुंमुयायरहो णिसायरदित्ति व. जसवंतहो पुरिसहो जसकित्ति व / घत्ता-किं कीरइ वेल्लिहिँ फुल्लियहिँ फुल्ल जोहँ रसु चक्खिवि णिग्गइ।। सोहग्गु पसंसिउ मालइहे महुयरु जाहें णिरारिउ लग्गइ // 2 // Woman is the ornament of man. सोहइ जलहरु सुरधणुछाय सोहइ णरवरु सच्चए वाया। सोहइ कइयणु कहौ सुबद्ध सोहइ साहउ विजण सिद्ध। सोहइ मुणिवरिंदु मणसुद्धिरा सोहइ महिवइ णिम्मलबुद्धि। सोहइ मंति मंतविहि दिहिरी सोहड किंकरु असिवरलदिए। सोहइ पाउसु साससमिद्धि सोहइ विहउ सपरियणरिद्धिश। सोहइ माणुसु गुणसंपत्ति सोहइ कज्जारंभु समत्ति। सोहइ महिरुहु कुसुमियसाह सोहइ सुहडु सुपोरिसराहट / सोहइ माहउ उरयललच्छिण सोहइ वरु वहुयश धवलच्छिण / घत्ता-गुणहरु मुट्ठिहे माइयउ सुद्धवंसु अण्णु वि कोडीसरु / णरहो कलत्तु सरासणु वि किं ण करइ सरीरु भामासुरु // 3 // 4 Teacher Pihitasrava arrives at Tribhuvanatilaka and Nagakumara visits him, लच्छीमइमुहपंकयछप्पउ तिहुयणतिलयणयर वकील) अणुहवंतु सिय अच्छइ जइयहुँ णं समाहि णं सरसइ णं दय णावइ उवसमु दमु जमु संजमु णं पञ्चक्खु धम्मु सइँ हूयउ णं तवसिरि सव्वंगहिँ घडियउ णं समिइहिं पयडिउ आहोयउ पंचवीसभावणभावंगउ सो जाइवि वंदिउ रइरमणे णायकुमारु णवियपरमप्पउ / इच्छियसुहु मुंजंतु सलील। पिहियासउ गुरु आयउ तइयहुँ। णं खम पुरिसवेस विहिणा कय / णाइँ अहिंसट दाविउ णियकमु / णं रिसिं सिद्धिविलासिणियउँ / सीलगुणामलरयणहिँ जडियउ / उज्झियबज्झन्भंतरसंगउ / दिण्णासीस मणोरुहदमणे। 7. C णिव्यत्तिः E णित्ति. 8.c omits this foot. 9. C जासु. 10. C जासु; E जाइ. 3. 1. A B सद्दए. 4. 1. ABDE °तिलए. 2. C सिरि. 3. A B D दूवउ. 4. A B D जोइउ. P.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036460
Book TitleNag Kumar Charita
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPushpadant Mahakavi
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year1972
Total Pages352
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size337 MB
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