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________________ धम्मि- मुखैर्गवादनिवांत-र्दिदृक्षूणां मृगीदृशां // व्योमांनोजमं तन्वन् / पुरं प्रावी विशत स तत् // 4 // | कुमारं सपरीवारं / व्यूढेऽवस्थाप्य वेश्मनि // ग्रासघासादिसामग्रीं / समग्रामप्यपूरयत् // 5 // एव. मेवं समायाताः / प्रवेश्य परमोत्सवैः // यथास्थाने न्यवेश्यंत / तेनान्येऽपि नरेश्वराः // 6 // र. 240 ज्ज्वाकृष्ट श्वासीद-त्यथ वीवाहवासरे / विदुषी व्यमृशद् द्रुप-दुहिता स्वहिताशया // 7 // सद | सत्त्वं स्वयं तातो / राज्ञां विज्ञातुमदमः // ददौ स्वयंवर ताव-न्मह्यमत्यंतवत्सलः // 7 // ये ताते. कळेला मुखोथी थाकाशकमलोना ब्रमने विस्तारता ते कुमारे ते नगरमा प्रवेश कर्यो. // 4 // पजी राजाए ते कुमारने तेना परिवारसहित एक विशाळ महेलमा उतारो थापीने तेनेमाटे जो. जन घास यादिकनी सघळी सामग्री करावी थापी. // 5 // वली एवीज रीते त्यां आवेला बीजा | राजानने पण महोत्सवपूर्वक प्रवेश करावीने तेणे योग्य स्थानके उतार्या. // 6 // हवे जाणे दोरीथी खेचायो होय नहिं तेम विवाहनो दिवस नजीक भाववाथी राजानी ते चतुर पुत्री पो ताना हितनी बाशाथी विचारवा लागी के, // 7 // मारा पिताए पोते राजाना सद्गुण अवगु. - / एने नहि जाणी शकवाथी मारापर स्नेह लावीने मारामाटे या स्वयंवर मंडप रच्यो . . // 7 // Jun Gun Aaradhak Trust P.P.AC.Gunratnasuri M.S.
SR No.036431
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages176
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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