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________________ धम्मि-टितांतरा // एए // सन्मुहूर्त कुमारं त-मथ प्रातिष्टपन्नृपः // दिपाश्वरथपत्त्योध-परा तेंद्रवैन / // 1100 // प्रयाणैरनवछिन्नैः / सोऽप्युर्वी खर्वयन्निव // विनोदैर्विदुषां कृत्त-क्वमो मार्गमलंघयत् // 1 // स श्रीपुरमकूपार-पारं पोत श्वाचिरात् // अवाप प्रेरितो हृद्यैः / शकुनैः पवनैखि // 2 // २३ए कुमारमागतं श्रुत्वा / श्रीपुरप्रतुरन्यगात् // जनयित्वा जनः कन्यां / स्थाने स्थातुं लनेत कः // 2 // ग्य , अने अमोने तो हवे पबरोना समूहथी नरेला मध्य जागवाळी गुफा पाश्रय करवालायक . // एए // पनी राजाए हाथी घोडा रथ तथा पायदळना समूहथी इंद्रने पण जीती श. के तेवा गठमाउथी उत्तम मुहूर्त समये ते कुमारने प्रयाण कराव्यु. // 1100 // ते कुमार पण अनवबिन्न प्रयाणोवडे पृथ्वीने आक्रमण करतो अने विद्वानोना विनोदोथी थाकने दुर करतोय. को मार्ग नवंघवा लाग्यो. // 1 // पवनथी प्रेरायेद्धं वहाण जेम समुडने किनारे तेम उत्तम श. कुनोथी प्रेरायेलो ते कुमार तुरत श्रीपुर नगरमां थाव्यो. // 2 // हवे ते गुणवर्मा कुमारने थावेलो जाणीने श्रीपुरनो राजा तेनी सन्मुख अाव्यो, केमके कन्याने उत्पन्न करीने कोण सुखे काणे बेशी शके ने? // 3 // तेने जोवाने श्वातुर थयेली स्त्रीनना जरुखा मांथी बहार निः PP.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036431
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages176
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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