________________ धम्मि मीश्वरं // 5 // मनुष्यो न दमोऽमुष्याः / प्रख्यातुमुचितं वरं // येनेयं निर्मिता धात्रा / स एव / मा स्याद्यदि प्रनुः // 6 // तदर्हति महीपाल / बाला सेयं स्वयंवरं / पुण्यान्येवोपदेदयति / तदस्या नचितं पति // 7 // तेषामेकांतभक्तानां / मेने नुमानिमां गिरं // राझा हि मंत्रिणो नेत्रं। त्व | मेत्रे तु मुखश्रिये // 7 // नृत्यहारांगनायुप्त-लोकलोचनचापलं // हेमकुंगांशुमंगार-शाश्वतीक // 4 // था कन्याना अयोग्य जगोएं विवाह करवायी नत्पन्न थयेलो अपयश या अमारां श्वे. त वाळवाळां मस्तकपर रही शके तेम नथी. // 5 // थाने लायक वर कहेवाने मनुष्य तो समर्थ नथी, माटे जे विधाताए थाने बनावी , तेज कदाच तेणीनो वर निर्माण करी शके ते. म लागे . // 6 // माटे हे स्वामी! या कन्या तो स्वयंवरने योग्य ने, तया ते वखते तेणी नां पुण्योज तेणीनो नचित वर देखाडी आपशे. / / 7 // एवी रीते एकांत नक्तिवाळा ते महामंत्रीननु वचन राजाए पण मान्यु. केमके मंत्री राजानी खरी अांख बे, बाकी चर्मनेत्रो तो मुखनी शोजामाटे . // 7 // पजी राजाए नाचतो वारांगनाए नष्ट करेल ने लोकोना नेत्रो. / नी चपलता जेमां एवो, तया सुवर्णकळशोना किरणोना समूहयी ज्यां शाश्वतो दिवज नगी Jun Gun Aaradhak Trust P.P.AC.Gunratnasun M.S.