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________________ धम्मि- ना शारदी शोनां / लीलालसपदान्यदा // हंसीवाजं पितुः क्रोमं / सदःसरसि साऽनजत् / / 71 / / खनीव रूपरत्नस्य / मंजूषेव गुणश्रियः / चक्रे जामातृचिंताः / चेतो दृष्टापि सा पितुः / / 72 // | कः स्यादस्या वरो योग्यः / पभिन्या श्व भास्करः // इति पृष्टा विशांपत्या / कुलामाया बगाषिरे 235 // 3 // स्युर्नाथ कोटिशः कन्या / न कापि पुनरोदशी // रंगायोरगवत्येव / यसीष्वपि वलि | षु // 4 // अस्या अस्थानविवाह–घटनाजन्मदुर्यशः // अस्माकं पलितश्वेते / न मूर्ध्नि स्थातु ऋषणसरखी लायक जमरने पहोंचेली . // 70 // शरद तुनी शोजाने विस्तारती एवी ते क. न्या एक दिवसे लीलापूर्वक धीमां पगला मुकतीथकी हंसी जेम कमलपर तेम सनारूपी तळावमां बेला पोताना पिताना खोलमां यावी बेठी. // 1 // रूपरूपी रत्ननी खाणसरखी तया गुणो. रूपी लक्ष्मीनी पेटीसरखी तेणीने जोवामात्रथीज राजानुं मन जमाश्नी चिंतायी पीडित थयु.॥ // 72 // कमलिनीनो जेम सूर्य तेम थानो योग्य चार कोण थशे? एम राजाए पुग्वाथी म होटा मंत्रीन बोल्या के, // 3 // हे स्वामी! था दुनियामां कोडोगमे कन्यान होय ने, परंत थाना सरखी कोइ पण नथी, केमके घणी वेलडी-मां पण नागरवेलज आनंद बापनारी / .P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036431
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages176
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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