SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 57
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ धम्मि- प्ररोहवत / मुदा प्रदक्षिणीचके / तं पुण्यफलदं मुनि // 11 // तस्मै प्रणमते दत्वा / धर्मलाना शिर्ष मुनिः // ध्वनिर्षितपर्जन्य-गर्जिरेवमुपादिशत् // 5 // नमनिःशेषविदेषि-कुलगाः सुल नाः श्रियः / / सुलजाः खलु जामिन्यो / लावण्योदकदीर्घिकाः / / 53 / / सुलगा कलानाश्वादि१५० | संपत्तिरपि देहिनां // वल्लजो धीमतामेक। एव धर्मः सुदुर्लभः // 54 / / धर्मः स्वर्मणिसंकाशो / ध. मः शर्मवनीघनः // धर्मो वर्म विषां जीतौ / धर्मः कर्महतिदमः / / 55 // गुरूक्तविधिना धर्मएवी रीते बोलताथका ते धम्मिले वृदने जेम वेलडीनो रोपो तेम हर्षपूर्वक ते पुण्यफलने देना. रा मुनिने प्रदक्षिणा करी. // 51 // पी प्रणाम करता एवा ते धम्मिलने धर्मलागनी आशीष देने ते मुनिए मेघना गर्जाखने जीतनारा शब्दथी यावी रीते उपदेश थाप्यो. // 52 // सर्व शत्रुनना समूहनी शोजाने नाश करनारी लक्ष्मी सुलन , तेमज लावण्यरूपी जलनी वावसरखी स्त्रीने पण सुलन जे. // 53 / / तेम हाथी घोमायादिकनी संपत्ति पण प्राणीजने सुलभ , प. रंतु बुध्विानोने वान एवो एक धर्मज दुर्लग बे. // 14 // धर्म चिंतामणि सरखो, सुखरूपी व. | नमां वरसादसमान, शत्रुजना डरसमये बखतरसमान तथा कर्मोने नाश करवामां समर्थ जे. // 5 // P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trus!!
SR No.036431
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages176
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy