SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 41
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ धम्मि वंविधाः सुताः // 70 // अथ पित्रोः श्रुते मृत्या-वत्याकुलितमानसः // शंपासंपानसंकाशं / वहन सुःखमचिंतयत् / / 71 // खां कीर्तिमपि शृण्वंतो। लांते केचिदुत्तमाः // स्वामकीर्ति स्वक न्यां / शृण्वतोऽपि न मे त्रपा / / 72 // यथायं तददन्योऽपि / परोक्षे मे तनिष्यते // दुर्यशः सकलो लोको / धिर धिर मां कुलपांसनं / / 73 / / आसंसार ध्वनायेव-मकीर्तिपटहे पट / / ही वज्रहृदयो नोर्ध्व-शोषं शुष्यति धम्मिलः // 4 // पितरौ मे विपेदाते / महियोगेऽपि वत्सलौ // एम तेनी शुछि पण कोण जाणे ? वळी कुलना विनाशसमये एवा पुत्रो पेदा थाय जे. // 0 // हवे पोताना मातपितार्नु मरण सांजळवाथी अत्यंत व्याकुल मनवाळो धम्मिल वीजळी पमवासर दुःख धारण करतोथको विचारखा लाग्यो के, // 1 // केटलाक उत्तम मनुष्यो पोतानी कीर्ति सांजळीने पण लङा पामे , त्यारे पोतानेज काने पोतानी अपकीर्ति सांभळतां बतां पण मने लड़ा थती नथी. // 2 // जेम था माणस तेम बीजा पण सघळा लोको परोद मारी अपकी. ति विस्तारशे, माटे कुलमां अंगारासरखा एवा मने धिक्कार ! धिक्कार ! // 3 // श्रा समस्त संसारमा थावी रीते मारो अपकीर्तिनो पटह वागतां बता पण वज्रसरखां मनवाळो या हं धम्मि PP.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036431
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages176
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy