________________ धम्मि- नास्ति यत् // 61 / / परस्परं विरोधिन्यो / यासां चित्तवचःक्रियाः / तासु लोनाभित्र्तासु / विश्रं. नः शंजलीषु कः // 6 // एता बूता श्वावेष्ट्य / कृत्रिमप्रेषतंतुनिः // मक्षिकामिव मुंवंति। निः सारीकृत्य पूरुषं // 63 // विझयोगे मिंतिकावद्या / अरक्ता अपि रागदाः // सिचामिव गुणाढ्यानां 205 / / / सतां ताधिन रंजनं // 64 / चेत्कोऽपि वसुधारान्निः। पर्जन्य श्व वर्षति / एताः स्थूलस्थली. प्राया / न तृप्यंति ततोऽप्यहो / / 65 / नत्पन्नः पौरधौरेय-श्रेष्टिनो निर्मले कुले // अवाप्नोमि ह. जेनां मन वचन अने क्रिया परस्पर विरोधवाळां बे, एवी ते लोगांध वेश्यामां विश्वास शं कामनो के ? // 6 // या वेश्यान करोळीयानीपेठे पुरुषने कपटप्रेमरूपी तंतुथी वींटीने माखीनीपेठे साररहित करीने तजी दे . // 63 // वळी ते वेश्या पोते अरक्त उतां व्यभिचारीनने राग पापनारी ने, परंतु तंतुनवाळां कपमांनीपेठे गुणवानोने तेजसाथे राग थतो नथी. // 6 // कदाच कोई वरसादनीपेठे वसुधाराथी (धनथी) वर्षे तोपण मोटी परखाळी चुमिनीपेचे ते वे. श्याननी तृष्णा मटती नथी. / / 65 // अरे! नगरना लोकोमा मुकुटसमान एवा शेउना निर्मल कुटमा उत्पन्न थयेलो था हुं श्रावी रीते वेश्याथी विझवना पामुं बु ! // 66 // बाव्यपणामां पां. PP.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust