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________________ Suu धम्मि- इत्यादिवाधितालापा-माश्वास्य वचनांतरैः / / वल्लनां सह मित्रेण / कुमारः स्वगृहं ययौ / / 54 // माई दादिण्यात्प्रकटं वक्तु-मशक्तश्चापलं मम // अज्ञापयप्रियो नंग्यं–तरेणायं धियां निधिः॥१५॥ सत्या अपि ममासत्या / ही जातेयं कलंकिता // संतापेनेति सा कष्टं / गमयामास वासरं // 16 // | // युग्मं // रजन्यां राजसूर्गुप्त-गात्रः सिखांजनेन सः // गत्वा पन्या गृहं कोण-देशमालंब्य | तस्थिवान् // 57 / पर्यकेऽथ विपर्यस्त-गात्रां मत्सीमिव स्थने // जगाद यामिनीयामा-पगमे तां थती होय तो तेम करो? केमके माराजेवू गम्मतनुं पात्र आपने बीजं क्यां मळशे? // 53 // एवी रीते दुःखित वचनोवाळी पोतानी ते स्त्रीने बीजी रीते अाश्वासना पापीने ते गुणवर्मा कु. मार मित्रसहित पोताने घेर गयो. // 55 // मारा महाबुद्धिवान नारे फक्त दाक्षिणताने लीधे मारं आ नगंबनपणुं प्रगटरीते नदि कही श्वकवाथी मने जुदा प्रकारथीज जणावी दीधुं . // // 55 // अरे हुं सती छतां पण मारापर असतीपणानुं कलंक याव्यु , एवी रीते संतापवडे | करीने तेणीए कष्टथी ते दिवस निर्गमन को. // 26 // पनी रात्रिए ते गुणवर्मा कुमार सिद्धांत जनथी अदृश्य शरीरवाळो थर कनकवतीने घेर जश् एक खुणामां बेठो. // 27 // हवे जमीन P.P.AC.Gunratnasuri M.S... Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036431
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages176
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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