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________________ धम्मि- स्वं / निशाशेषमवाहयत् // 30 // प्रातः प्रदाय मित्राय / कुमारस्तत्पदांगदं / गत्वा वध्वा गृहं सः / त्रा। तया रंतुं प्रचक्रमे / / 31 // सा न्यगादीदमी दूरे / मुच्यतां देव देवनाः // ह्यःपृष्टं किंकीणी. | वृत्तं / प्राग्मित्रेण प्रकाशय // 32 // सोऽवदविदितं दाम-विलमे लमतो मया // किंचित्तवान्य 20U | दप्यस्ति / स्रस्तं सम्यग्विचिंतय // 33 // ततः सा चकिताऽवोचत् / तत्किं वद जगाद सः // यत्ते | पादांबुजे धत्ते / हंसलीलां तदेव तत् / / 34 / प्रत्येमि किंकिणीवन्मे / तत्सादात कुरुषे यदि // कनकवती विमानमां बेशीने जारसहित पोताने वेर गइ. तथा ते गुणवर्मा कुमारे पण पोताने घेर आवीने बाकीनी रात्रि निर्गमन करी. // 30 // प्रजाते मित्रने ते फांफर देश्ने, तथा कन. कवतीने घेर जश्ने तेणीनीसाथे ते रमवा लाग्यो. // 31 // त्यारे कनकवती बोली के हे स्वामी! या पासानने हमणा दूर मुको ? अने गरेकाले पूजेद्यं घुघरीनुं वृत्तांत प्रथम मित्रमारफते कहे. वरावो? // 3 // त्यारे ते सागरमित्र बोल्यो के हे गगरायेली कनकवति! में लमयी जाण्यु ले के तारं बीजं पण कईक खरी पडद्यं बे. माटे बरोबर विचार ? // 33 // त्यारे तेणी चकित थश्ने बोली के ते शं? ते कहे ? त्यारे ते बोल्यो के जे तारां चरणकमलपर हंसनी लीलाने धारणः | P.P: AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036431
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages176
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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