________________ 5 धम्मि- वरराज न राजते / मंबरेण महाधियः // श्रिये च दादयमे वैकं / तदय झास्यते तव // ए // / वद क्रूरं समाख्याति / कं पृथिव्यंबुचारिषु // कं वा प्रसुप्तराजीव-राजीजागरणदामं // 55 ॥अ. त्राहिमकरमिति / प्रोत्तरय्यान्यधत्त सः // कृते प्रतिकृतं कुर्या-दिति वाक्यं स्मरन्निव / / 76 // पृ. बकाः संति भूयांसो / दुर्लजास्तूत्तरप्रदाः / / एकं प्रश्नोत्तरं ब्रूहि / मम त्वमपि धीमति // // श्र नडाए ते वरराजाने कह्यु के, // 73 // हे वरराजा! महाबुझिवानो कई श्रावस्थी शोलता न. थी, फक्त एक चतुराज शोजा करनारी में, थने ते तमारी चतुराश हवे माबुम पडशे. // 4 // तमो कहो के जुचर तथा जलचरनेविषे क्रूर कोने कहे जे ? तथा बीमायेलां कमलोनी श्रेणिने प्रफुल्लित करवाने कोण समर्थ बे ? // 55 // त्यारे तेणे उत्तर यायो के, 'अहिमकर ' अहि एटले सर्प ए चरोमां तथा मकर एटले मगरमन ए जलचरोमां क्रूर , तथा 'अहिमकर ' एटले सूर्य ए कमलोने विकस्वर करे . हुवे ' करेला प्रते सामुं करवू ' एवां वाक्यने याद करना. रनीपेठे सुरेंद्रदत्त पण बोल्यो के, // 6 // पूजनारा तो घणा होय बे, परंतु तेनो नत्तर देनारा दर्लभ होय , माटे हे बुधिवाळी ! तुं पण मारां एक प्रश्ननो नत्तर कहे ? | 09 // अहिं केवो / PP.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust