________________ धम्मि- ज्जुस्खलितसंचरं / सार्थ सोऽस्थापयद्युक्त्या / चमूमिव चमूपतिः / / 52 // पयकः कथक श्वाय / सं / मा विप्रः समुपेत्य तं / / बालपीन्मधुरालापै-गुहं गंतुमना निजं // 53 // पुरेऽस्मिन्नेव वास्तव्यः / सो. ऽहं वररुचिश्चिरं // बहित्वाय यास्यामि / गृहं नीडमिवांडजः / / 54 // त्वं मे प्रियवयस्योऽसि / 55 सौहृदं मा स्म विस्मरेः / / पतितः संकटे बुधि-घस्मरे मां स्मरेः पुनः // 55 // गृहाण वं जवा. देतान् / यवान मैत्र्या लवानिव / / यथा तथामी कस्यापि / न प्रकाश्या रहस्यवत् // 16 // अमी तंबून नाख्या, तथा सेनापति जेम सैन्यने तेम तेणे त्यां सगवमयी पोतानो सार्थ स्थाप्यो.॥शा हवे ते मार्गे मळेला अने कथा कहेनार तथा पोताने घेर जवाना मनवाळा ते ब्राह्मणे तेनीपा. से घावीने कडं के / / 53 // हुं या वररुचि नामनो ब्राह्मण घणा काळयी बाज नगरमा रहं बं, तथा देशाटन करीने पती जेम पोताना माळाप्रते तेम हवे मारे घेर जश्श. // 14 // मारो प्रिय मित्र . माटे तारे मित्रा विसरखी नही, तेमज बुधिगम्य संकट पडती वखते वळी मने तं याद करजे. // 55 // वळी तुं आपणी मित्राश्ना लेशसरखा था यवोने ग्रहण कर? वळी गुप्त वातनीपेचे तारे कोश्ने पण सहेज वातमां आ जव संबंधि विवेचन करवू नहि. // 26 // मंत्रथी P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust