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________________ धम्मि- रीव गिरिशस्यास्या-ऽजनि जाया मनोरमा / यया संगम्य च भू-दनिशं वृषनासितः // 7 // अपुत्रयोस्तयोर्याति / काले युगलिनोरिव // धर्मदत्तोऽभवत्पुत्रः / कृतपुण्यप्रनावतः // 7 // वर्धिः तोऽध्यापितः पित्रा / युवा स परिणायितः / श्रीशेषश्रेष्टिनः पुत्रीं / सुरूपां नामतोऽर्थतः // 5 // 45 पितुः प्रसादात्तीरस्थो / गृहव्यापारवारिधः // धर्मदत्तस्तया पल्या-ऽचुंक्त गोगाननारतं // 10 // तथा द्रव्य मेलववामा हुशियार अने लक्ष्मीयी वीजा कुबेरसरखो यशोधर नामे एक शेठ त्यां व. सतो हतो. // 6 // महादेवनी जेम पार्वती तेम तेनी मनोरमा नामे स्त्री हती, के जे सहित ते हमेशां धर्मथी शोजायमान (वृषजना श्रासनवाले) हतो // 7 // युगलीयांनी पेठे थपुत्र एवा तेज बन्नेनो ( केटलोक ) समय गयाबाद तेजने (पूर्व) करेला पुण्यना प्रजावधी धर्मदत्त नामे पुत्र थयो. // 7 // उमरलायक थये बते पिताए तेने जाणावीने श्रीशेषशेउनी उत्तम रूपवा. ळी सुरूपा नामनी पुत्रीसाथे परणाव्यो. // 5 // पितानी महेरबानीथी घरना व्यापाररूपी समुद्रने कांवे बेलो एटले घरकामनी अंदर ध्यान आपवानी जरुरतविनानो ते धर्मदत्त ते स्त्रीमाथे . | मेशां एश माणवा लाग्यो. // 10 // एकदिवसे आकाशगंगानां मोजांसरखां (अति नज्ज्वल ) P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036430
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages173
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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