________________ धम्मि-| मातः स्वजातिसाम्यात्त्वं / यद्यस्यां रज्यसे स्त्रियां / / तत्किमेतेषु न मयि / पंक्तिनेदो हि दुस्सहः // 1 // एवं चिंताचिताधूम-धूसरास्यं नृपांगजं // ऊचे सुरेंद्रः स्वमाणि / स्नपयन् कृपयेरितः ॥शा | सखे सखेदतां मुंच / पिबेदं पावनं पयः // श्यं स्वयंवरा देवी / भारती त्वां वुवुर्षति // 3 // त. 23 | वात्मनिंदनादेव / कर्माज्ञानविपाकिमं // दृढमप्यगलन्मन्ये / हिमं तीवातपादिव // 4 // एवं वा क्यामृतं पूर्व / सामु पः पपौ // ततस्तदर्पितं विद्या-मणिस्नातोज्ज्वलं जलं // / // अथ जाता स्पर्श केम करती नथी? // 100|| वळी हे सरस्वती देवी ! स्वजातिना तुल्यपणाथी ज्यारे तुंबास्त्री प्रत्ये (सुगदाप्रत्ये) संतुष्ट थयेली ने त्यारे था बीजा विद्यार्थिनप्रत्ये शामाटे तुं तुष्ट थयेली ? अने माराप्रत्ये केम तुष्ट थती नथी? माटे खरेखर (एवी रीतनो) पंक्तिनेद तो सहन न थशके तेवो. ॥१॥एवी रीते चिंतारूपी चिताना धुमामाथी कांखा मुखवान ते राजपुत्रने कृपायी प्रेराएला सुरेंद्रदत्ते पो. ताना मणिने स्नान करावतांथकां कहां के॥शा हे मित्र! तुंखेद तजीने या पवित्र जळनुपान कर? या स्वयंवरासरस्वती देवी तने वरवाने श्वे // 3 // हुएम धारं बु के याथात्मनिंदाथी तारुं जदय पावेवं | निबिड झानववरणीय कर्म पण तीव्रतापथी हिमनी पेठे नष्ट थयु // 4 // एवीरीतना सद .P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust