________________ धम्मि-| सूनुः प्रकृतिबालिशः // महामतेः सुरेंद्रस्य / जंघालस्येव मंयरः // 63 // अध्येत्रापि प्रयत्नेन / स. | लीलमपि पाठितः // नासौ मिमिल सामुडे-बोलो यून श्वाध्वनि // 64 / / प्रायो दुर्गेऽपि शा. साध्व–न्यध्वगस्येन्यजन्मनः // न छाययेव देहस्य / व्यभिचेरे सुगद्रया // 65 // स्वप्रतिजानु. मानेन / संगृह्णाना गुरोगिरः // अन्येऽपि तत्र शालायां / छात्राः पेठुः परे शताः // 66 // कदा चन विनेयानां / गुरुः प्रज्ञां परीदितुं // गांजीयवारिधेरूची-सध्री, वाचमूचिवान् // 67 // हंजपुत्र अभ्यासमां महाबुध्विान सुरेंद्रदत्तनी पारळ रही गयो. // 63 // अध्यापके महेनत ले. इने सहेलीरीते गणावतां तां पण ते राजपुत्र मार्गमां बाळक जेम युवानने तेम सुरेंद्रदत्तने पहोंची शक्यो नदि // 64 // प्रायें करीने कठिन शास्त्रोना अन्यासमां पण शरीरनी गयानी पेठे ते सुनद्रा ते श्रेष्टीपुत्रथी जुदी पडी नहि. / / 65 / / वळी ते शानमां पोतपोतानी बुधिप्रमाणे गुरुवचन अंगीकार करनारा बीजा पण सेंकडोगमे विद्यार्थी अन्यास करता हता // 66 // एक दिवसे विद्यार्थीनी बुधिनी परीदा करवामाटे गुरु गंजीरतारूपी समुद्रना मोजांसरखी वाणी बोल्या // 67 / / हे बुधिमान् शिष्यो तमो सघळा सांपळो जे कोश् राजाने पोताना. Jun Gun Aaradhak Trust P.P.AC.Gunratnasuri M.S. .