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________________ धम्मि- मनोऽप्यत्र / सूनुर्वसुमतीपतेः // समं सुरेंद्रदत्तेन / तेनाध्येतुं प्रचक्रमे // 55 // स्तश्च सागरः श्रे माटी / तत्राजुणसागरः // यस्यानुवेलं वर्धिष्णो-रस्ताघः कमलोदयः // 60 // सत्यभामोदरसरः | पद्मिनी तस्य नंदिनी // सुनदानदनिद्राणां-बोजवित्राजिलोचना / / 61 // सापि बाव्याचकोरीव / कलावत्यनुरागिणी // अधीयती सतीर्थ्याद् / पतिश्रेष्टिपुत्रयोः // 6 // पठन पश्चादप| रं बळवान बळदने उपामवु कंश मुश्केल पडे नहि. ॥जा अमित्रदमन नामनो राजानो पुत्र पण अहिं ते सुरेंडदत्तनी साथेज अन्यास करवा लाग्यो॥ 50 // हवे ते नगरमां गुणोना समुद्र स. रखो सागर नामे शेठ (वसतो हतो) दणे दणे जन्नति पामता (वेखखते वृधि पामता) एवा जे शेठनो लक्ष्मीनो जदय अपार हतो. // 60 // ते शेग्ने सत्यनामा नामनी स्त्रीना नदर रूपी तळावमांकमलिनी सरखी तथा विकसित कमळसरखी शोनिती अांखोवाळी सुना नामनी पुत्री हती. / / 61 // चंद्रप्रत्ये जेम चकोरी तेम बाब्यपणाधीज कलावानप्रत्ये स्नेहवाळी ते सुगडा पण ते राजपुत्र अने श्रेष्टीपुत्र बन्नेन साथे विद्यान्यास करती हती. // 6 // जेम धीमे चालना. | रो माणस जतावळी चालना माणसनी पारळ रही जाय . तेम वजावधी खट्पबुधिवाळो रा. Jun Gun Aaradhak Trust P.P.AC.Gunratnasuri M.S.
SR No.036430
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages173
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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