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________________ 136 धम्मिन्नृत्यमाश्चर्यान् / मूर्धानं धम्मिलोऽधुनोत् / / 35 // तं चमत्कृतमालोक्य / कलावंतमिलापतिः / / | धनराशिं ददौ तस्यै / केलिशैलसमं श्रियः // 36 // धीमतोऽस्यैव सांनिध्या-बब्धं धनमियन्मया // इति सा धम्मिले प्रेम-सर्वस्वं तत्प्रभृत्यधात् / / 37 // अथ मन्मयकेलिना-मोऽयमिति धम्मिलः // नीतः पणांगनावीथीं / वयस्यैरियन्नापत // 30 // तन्वंग्यश्च जुजंग्यश्च / तुल्याः साधुभिरूचिरे // श्मा विशेषतो वेश्याः / शुजलेश्यानिशुचिकाः // 35 // गणिकाः कणिकामात्र-सुखसंपत्ति जोश्ने धम्मिले आश्चर्यथी पोतानुं मस्तक धुणाव्यु. // 35 // एवी रीते ते कलावान धम्मिलने आश्चर्य पामेलो जाणीने राजाए तेणीने लक्ष्मीने कीमा करवाना पर्वतसरखो धननो ढगलो था. प्यो. // 36 // या बुद्धिवान पुरुषना सहायधीज मने बाटधु बधुं धन मव्यु , एम विचारीने ते सारथी धम्मिलप्रते पोतानो सर्व प्रेम धारण करवा लागी. // 37 // हवे या कामक्रीडाने लाय क., एम विचारीने तेना मित्रो तेने वेश्या ना पाडामां ले गया, त्यारे धम्मिले तेजने कहां के, // 30 // स्त्रीने अने नागणो बनेने साधुनए तुल्य कहेली , तेमां पण विशेषे करीने वे श्याने तो शुज लेश्यानो नाश करनारी . // 35 // वेश्यान किंचित् मात्र सुखसंपत्ति बाप E.P.AC. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036430
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages173
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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