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________________ धम्मि-टी शुश्राव पुत्रार्थः / यत्तत्सर्वं विनिर्ममे // 6 // पुरे तांगमझानी / युगंधरमुनीश्वरः // नवांमा जोधिपतज्जंतु-जातपोतायितक्रमः / / 70 // तं सिषेविषवः पौराः / प्राचलनेकया दिशा। न ह्यली नां गतिर्निन्ना / जुमे कुसुमिते सति / / 11 // श्रेष्टी सुरेऽदत्तोऽपि / रयमध्यास्य सप्रियः // अवः | दिष्ट मुनि दिष्ट-त्रितयझमुपेत्य तं // 7 // नाम नाम निषमेषु / नांगरेषु निधिर्धियां // वितेने देशनां साधु-र्माधुर्याधरितामृतां // 13 // जो जो जव्या जवारण्ये / ब्रमता भविना भृशं // // 6 // // एवामां ते नगरमां संसारसमुद्रमा पमता प्राणीनने वहाणसरखा ने चरणो जेना एवा. युगंधर नामना झानी मुनिराज पधार्या. // 70 // तेमने सेववानी बावान नगरना लोको एक दिशाए चाव्या, केमके वृक्षपर ज्यारे पुष्पो आवे त्यारे जमरानतुं अन्य स्थले गमन थाय नहि. // 11 // ( ते वखते.) सुरेंददत्ते पण प्रियासहिन रथमां बेशीने तथा त्यां आवोने त्रिकालज्ञानी एका ते मनिराजने वांद्या. // 72 // पड़ी नमी नमीने नगरना लोको बेगवाद ते बुद्धिवान मु. नि.माधुर्यथी अमृतने पण दूर करनारी देशना देवा लाग्या. // 13 // हे जव्यलोको मानव रूपी वनमां अत्यंत भमतो प्राणी ( मुश्केलीथी) अमृतरससरखो मनुष्यजन्म मेळवी शके है। P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036430
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages173
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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