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________________ ૩૫ लग्गी, चोर या शत्रके आक्रमण इत्यादि ) का भय नहीं हो, जो और भी किसी दोषसे बची हो और जो बड़ी रमणीय हो। इसके बाद ऊंची नीची जगहको बराबर करवाता हो और ढूंठ झाडीको कटवाकर साफ कर देता है। तब, शहरका नकशा तैयार करता है, सुन्दर, नाप जोखकर भाग भागमें बांट, चारों ओर खाई और हाता, मजबूत फाटक. चौकस अटारिया, किलाबन्दी, बीच बीचमें खुले उद्यान, चौराहे, दोराहे, चौक, साफ सुथरे और बराबर राजमार्ग, बीच बीचमें दुकानों की कतारें,आराम. बगीचे, तालाब, बावली, कुयें, देवस्थान, सुन्दर और सभी दोषोंसे रहित । --मिलिन्द प्रश्न, अनु० भिक्षुजगदीश काश्यप पृष्ठ ४०१, રાજધાનીઓ નદીને કાંઠે જ હોય છે, તેનું એક જબ્બરદસ્ત પ્રમાણ જૂઓ— ___ 'जंबुद्दीवे भरहवासे दस रायहाणीओ पं.तं. चंपा, महुरा, वाणारसी, य सावत्थी, तहय सातेतं हथिणउर, कंपिलं, मिहिला, कोसंबि, रायगिहं । " । -ठाणांगसूत्र वृत्तिसहित पृष्ठ ४७७. 6५२ मतावली २५, मथुरा, मनारस, श्रावस्ती, અયોધ્યા, હસ્તિનાપુર, કાંપિલ્ય, મિથિલા, કૌશામ્બી અને રાજગૃહ આ દસે રાજધાનીઓ નદીને કાંઠે જ હતી. Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035295
Book TitleVaishali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVijayendrasuri
PublisherKashinath Sarak
Publication Year1958
Total Pages170
LanguageGujarati
ClassificationBook_Gujarati
File Size13 MB
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