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________________ संख्या २] रंगून से आस्ट्रेलिया १२३ HORSES ONOMIGTITAN सुबह डेक पर से. सिडने बन्दरगाह में जहाज़ का घुसना ज़रूर देखें। ___ सुबह बड़े कड़ाके की ठंड थी और हवा ज़ोर से बह रही थी, तो भी मैंने डेक पर खड़े रहकर इस दृश्य को देखना ही उचित समझा। दो चट्टानों के बीच से सिडने बन्दरगाह में जाने का रास्ता है । इस मुहाने को पार करते ही एक । बड़ी सी झील में आ गये, ऐसा प्रतीत होता है। [हे स्ट्रीट (पर्थ ) वस्ट ग्रास्ट्रेलिया ।] इस स्वाभाविक कृति से सिडने का बन्दरगाह दुनिया वसा हुया है। पहले नावों से ग्राना-जाना होता था। अब के प्रमुख सुरक्षित बन्दरगाहों में गिना जाता है । खाड़ी के इस पुल से दोनों किनारे जोड़ दिये गये हैं । सभी अोर उच्च स्थलों पर संदर गृह-समृह नज़र अाते हैं। पुल निर्माण करनेवालों ने मसविदा बनाया था कि समुद्र-स्नान के कई रमणीय स्थान हैं। सिडने के पुल के पुल के लिए, जो ऋण लिया जायगा (इस देश में सब ऊपर का ढाँचा समुद्र से ही दिखता था, पर खाड़ी में से ऋण लेकर ही काम किया जाता है) उसका सूद इस पुल उसके विशालकाय अधगोलाकार स्वरूप का पूर्णतया पर से आने-जानेवालों के ऊपर कर लगाकर अदा होता अवलोकन हो सका। यह पुल दुनिया के एक स्पैन के रहेगा । कर बहुत कड़ा है, फिर भी यह हाल है कि जो पुलों में सबसे बड़ा है । इसके मध्य के स्पेन की मेहराब की आमदनी इस ज़रिये से होती है वह उसकी मरम्मत के लिए लम्बाई १,६५० फुट है व उँचाई ४४० फुट । पानी को भी पर्याप्त नहीं है। प्रजा-कर से इस सफ़ेद हाथी के लिए सतह से पुल १९० फुट ऊँचा है, जिससे उसके नीचे से सूद व मरम्मत का खर्च निकालना पड़ता है। जब तक बड़े बड़े जहाज़ निकल जाते हैं। पुल की चौड़ाई १६० एक तरफ़ से रंग कर दूसरे तरफ़ पहुँचा जाता है तब तक फुट है, जिस पर ४ बिजली की रेल की पटरियाँ, अाट पहले का हिस्सा फिर रंगने के काबिल हो जाता है । इस मोटरों के एक साथ निकलने की सड़क (५७ फुट), दो लिए इसका रंगने के लिए एक स्थायी विभाग ही स्थापित पैदल रास्ते दस दस फुट के बने हुए हैं। इसके बनाने में है और हमेशा काम जारी रहता है । ५७,००० टन लोहा लगा है और कुल ख़र्च १० करोड़ हमारा जहाज़ पिरमांट हार्फ पर जाकर लगा । सिडने रुपया पड़ा है। हमारा जहाज़ जब इस पुल के नज़दीक में जहाज़ अाट रोज ठहरता था, इसलिए अच्छी तरह आया तब ऐसा भ्रम हुअा कि जहाज़ का मस्तुल घूम-फिरकर देखने का समय था। घाट से शहर जाने के पुल से बहुत ऊँचा है और ज्यों-ज्यों जहाज़ बढ़ता गया, लिए बस और फेरी अाध-आध घंटे पर छूटते थे। सिडने यह भान होने लगा कि मस्तूल ज़रूर टकरा जायगा। पर में पाठ रोज़ अच्छी तरह बिताने के लिए सैलानियों के जब पुल कुछ फुट रह गया तब इस कदर ऊँचा होने मनोरञ्जन के काफी स्थान है। टूरिस्ट कम्पनियाँ शहर में लगा कि जहाज़ का मस्तुल उसके नीचे चला गया। इस अथवा बाहर दूर स्थानों पर मोटर ले जाती है । हर एक घटना का स्वयं अनुभव करके ही उसका सच्चा स्वरूप यात्री के लिए भाड़ा नियत है। फेरी और ट्राम से भी जाना जा सकता है। सिडने शहर खाड़ी के दोनों तरफ़. समुद्र-तट के स्थानों पर जाया जा सकता है। शहर में Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035249
Book TitleSaraswati 1937 01 to 06
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDevidutta Shukla, Shreenath Sinh
PublisherIndian Press Limited
Publication Year1937
Total Pages640
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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