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________________ आगम (४०) भाग-4 “आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 2 अध्ययनं मूलं - /गाथा-], नियुक्ति : [७२४/७२४], भाष्यं [१२३...] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र-[४०]मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि-2 प्रत चूणों नियुक्ती श्री 18 अतिसरमाणाई मुद्धगाई पुणो य कोमलकमलोवमेहिं हत्थेहिं गिहिऊण उच्छंगनिवेसिताई देंति समुल्लावगे सुमधुर, पुणो पुणो 31 भयाध्यवआवश्यक मंजुलप्पभाणिते, अहं णं अहण्णा ४ एतो एगतरमावि ण पत्ता, ओहत जाव झियाइ, इमं च ण कण्हे जाब विभूसिते पादवंदए साने आगच्छति, तं पासति, पादग्गहण करेति, करेचा एवं व. अनया तुम्मे अम्माओ! ममं पासित्ता हट्ट जाय भवह, कि अज्ज ४ भावाला जाब झियाह?, तए सा तं सव्वं परिकहति, सेवि एवं व०-मा णं जाव झियाह, अहं णं तहा पचिस्सामि जहा णं ममं सहोदरे | जाच भविस्सतितिकट्टु ताहि इहाहि जाव वग्गृहि समासासति २ अट्ठमं पगेहति, पगेण्हेत्ता जहा भरहे तहा हरिणेगमेसि आरा-18| ॥३५८॥ | हेति, सेऽवि एवं व०- होहिति तव देवलोगरचुते सहोदरगे, तिनि बार पडिमणिचा पडिगते, कण्हेवि तं सब देवतीए पडि कहेता पडिगते, तए ण सा अन्नया कयाती गयं सुमिणे पासित्ता पडिबुद्धा जाव परिबुडा बहति, तए ण सा णवण्हं मासाण जाव & जासुमणाबचबंधुजीवसमप्पमं सवणयणकंतं सुकुमालं जाव सुरूवं गजतालुयसमाणं दारगं पयाता, जम्मणं जहा सामिस्स सिद्धत्यो | करेति जाव जम्हाणं अम्हें इमे दारगे गततालुयसमाणे तं होऊ गं एतस्स णामधिज्ज गयसुकुमाले २, सेस जहा मेहे जाव अलं | भोगसमत्थे जाते यावि होत्था। * तेणं कालेण तेणं समएणं वारवतीए सोमिले णाम माहणे परिवसति, अड्डे जाव सुपरिणिहिते यावि होत्था । तस्स सोम- ॥३५८॥ स्सिरी णाम माहणी होत्था, तेहिं सोमा णामं दारिया होत्था रामाला जाव सुरूवा, रूवेण य जोव्यणेण य लायनेण य जाव | उफिट्ठा उकिट्टसरीरा यावि होत्था । तएणं सा अभया फयादी पहाता जाब विभूसिता बर्हि खज्जाहि जाव परिक्वित्ता सयायो गिहातो पटिनिक्खमति २ रायमग्गसि कणगतिंदूसगेण कीलमाणी २ चिट्ठति । दीप अनुक्रम (67)
SR No.035054
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 05 Aavashyak 2 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages328
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size26 MB
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